गरीब’ भिखारियों के झोलों में छिपी ‘अमीरी’ : झोले में पर्सों का अंबार और हजारों की नकदी, प्रशासन के अभियान से उजागर हुई चौंकाने वाली सच्चाई, दुसरे शहर से आकर कर रहे भिक्षावृत्ति........

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : मध्य प्रदेश के इंदौर में इन दिनों भिक्षावृत्ति के खिलाफ प्रशासन का अभियान चर्चा में है। हाल ही में इस अभियान के तहत कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया। शुक्रवार को जिला प्रशासन की टीम ने जब शहर में दो भिखारियों की तलाशी ली, तो उनकी ‘गरीबी’ के पीछे छिपी ‘अमीरी’ ने सबको दंग कर दिया।

महिला भिखारी के झोले में मिला ‘खजाना’

इंदौर के हाई कोर्ट चौराहे के पास मस्जिद के बाहर बैठी एक महिला भिखारी पर प्रशासन की नजर पड़ी। जब टीम ने उसकी तलाशी ली, तो उसके झोले से करीब 30-40 पर्स और उनमें से कुल 45,000 रुपये नकद बरामद हुए। यह महिला लंबे समय से इस इलाके में भिक्षावृत्ति कर रही थी। 

प्रशासन के अनुसार, अब यह जांच की जा रही है कि महिला के पास इतने सारे पर्स कहां से आए। फिलहाल, इस महिला को रेस्क्यू करके उज्जैन के एक आश्रम में भेजा गया है। 

पुरुष भिखारी के पास मिले 20,000 रुपये और टिकट

इसी अभियान के तहत, टीम ने एक अन्य पुरुष भिखारी की भी तलाशी ली। उसके पास से 20,000 रुपये नकद और रेलवे के टिकट मिले। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह दूसरे शहर से इंदौर आकर भिक्षावृत्ति करता है। 

पहले भी हो चुके हैं ऐसे खुलासे

यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में भिखारियों के पास बड़ी रकम मिली हो। कुछ समय पहले, एक महिला भिखारी के पास 75,000 रुपये नकद बरामद हुए थे। 

भिक्षावृत्ति मुक्त इंदौर का सपना

इंदौर प्रशासन इन दिनों शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के मिशन पर काम कर रहा है। इसके तहत भिखारियों को रेस्क्यू करके पुनर्वास केंद्रों में भेजा जा रहा है। प्रशासन ने यह भी सख्त आदेश जारी किया है कि अगर 1 जनवरी  के बाद कोई व्यक्ति भीख मांगते या देते हुए पकड़ा गया, तो उस पर कार्रवाई होगी। 

प्रशासन का कहना है कि दूसरे शहरों से लोग इंदौर आकर भिक्षावृत्ति करते हैं, जिससे शहर की छवि खराब होती है। इसी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

सोचने पर मजबूर करने वाली हकीकत

इंदौर में भिक्षावृत्ति का यह पहलू दिखाता है कि समाज के निचले स्तर पर भी कैसे लोग अमीरी-गरीबी की परिभाषा बदल रहे हैं। यह घटना सिर्फ भिक्षावृत्ति पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह भी सोचने को मजबूर करती है कि समाज को इस समस्या से कैसे निजात दिलाई जाए। क्या ऐसे ‘अमीर’ भिखारियों को सही दिशा में लाकर उनकी ऊर्जा और संसाधनों का सदुपयोग किया जा सकता है?

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