CG : अब अपंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच , कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर मिलेगी 1 लाख की सहायता राशि साथ ही कार्यस्थल पर दुर्घटना से दिव्यांगता पर मिलेंगे 2.50 लाख रुपए...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर, छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में निर्माण श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। अब ऐसे निर्माण श्रमिक, जिनका किसी कारणवश पंजीकरण नहीं हो पाया है, उनकी कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को भी आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। सरकार ने ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना’ में संशोधन करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अपंजीकृत श्रमिकों के कार्यस्थल पर दुर्घटना से मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 1 लाख रुपए की सहायता राशि मिलेगी।

अब तक की योजना और नए संशोधन: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना’ के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को पहले से ही निम्नलिखित लाभ मिलते रहे हैं:

  • सामान्य मृत्यु पर: 1 लाख रुपए।

  • कार्यस्थल पर दुर्घटना से मृत्यु पर: 5 लाख रुपए।

  • कार्यस्थल पर दुर्घटना से दिव्यांगता पर: 2.50 लाख रुपए।

अब इस योजना में बदलाव करते हुए अपंजीकृत श्रमिकों के कार्यस्थल पर दुर्घटना से मृत्यु होने पर भी 1 लाख रुपए की सहायता राशि देने का प्रावधान जोड़ा गया है।

निर्माण श्रमिकों को बड़ी राहत: श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए श्रम मंत्री और छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री लखन लाल देवांगन ने यह कदम उठाया है। पहले, अपंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाती थी। अब यह निर्णय श्रमिकों के परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।

वर्ष 2023 में सहायता राशि वितरण: जनवरी से नवंबर 2023 के बीच, कुल 1502 निर्माण श्रमिकों के आश्रितों को ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना’ का लाभ दिया गया। सहायता राशि को सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाया गया, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई।

सरकार का उद्देश्य: इस नई पहल का उद्देश्य उन श्रमिकों के परिवारों को सहायता प्रदान करना है जो पंजीकरण न होने के कारण अब तक सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते थे। यह कदम श्रमिकों और उनके आश्रितों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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