CG : अननेचुरल-सेक्स बना प्रिंसिपल की मौत का कारण , 4 दिन पहले बने नये दोस्त को प्रिंसीपल ने घर में पार्टी के लिए बुलाकर किया अप्राकृतिक कृत्य , नाराज युवक ने गुस्से में कर दी हत्या, गिरफ्तार....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 24 दिसंबर 2024 को हुई एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। डोंगरी स्कूल के प्रभारी प्राचार्य, मनोज कुमार चंद्राकर (40 वर्ष), की खून से सनी लाश उनके घर से बरामद हुई। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया, जिसने हत्या की पूरी कहानी बताई। यह मामला अप्राकृतिक कृत्य के कारण उपजे गुस्से और विश्वासघात की दुखद परिणति है।

घटना की शुरुआत: रेलवे स्टेशन पर मुलाकात

आरोपी हरीश कुमार पैकरा (24 वर्ष), जो बलौदाबाजार का निवासी है, की मुलाकात प्राचार्य मनोज चंद्राकर से 23 दिसंबर को बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर हुई थी। यह पहली मुलाकात जल्द ही दोस्ती में बदल गई। 24 दिसंबर को, प्राचार्य ने हरीश को अपने घर पार्टी के लिए बुलाया।

पार्टी और अप्राकृतिक कृत्य

चिल्हाटी स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के मकान नंबर 39 में पार्टी आयोजित की गई। दोनों ने मिलकर चिकन खाया और शराब का सेवन किया। नशे की हालत में, प्राचार्य मनोज ने हरीश के साथ अप्राकृतिक कृत्य किया, जिससे हरीश नाराज हो गया।

हत्या: गुस्से का खतरनाक अंजाम

अपमान और गुस्से से भरे हरीश ने किचन में रखे तवे से प्राचार्य के सिर पर वार किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद, हरीश ने वहां से भागने का फैसला किया, और शव दो दिनों तक घर में ही पड़ा रहा।

परिवार की चिंता और शव की बरामदगी

प्राचार्य की पत्नी और बच्चे घटना के समय जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव में थे। दो दिनों तक जब मनोज ने फोन नहीं उठाया, तो उनकी पत्नी को शक हुआ। 26 दिसंबर की शाम, वह अपने भाई के साथ चिल्हाटी के घर पहुंचीं। उन्होंने देखा कि दरवाजा खुला हुआ था और अंदर तेज बदबू आ रही थी। कमरे में मनोज का खून से लथपथ शव पड़ा था।

पुलिस की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी

पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। लगभग 300 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद, पुलिस को एक संदिग्ध की पहचान हुई। आरोपी हरीश पैकरा डोंगरगढ़ में छिपा हुआ था और महाराष्ट्र भागने की फिराक में था।

27 दिसंबर को, पुलिस ने हरीश को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पूरी घटना की जानकारी दी।

पृष्ठभूमि: प्राचार्य का जीवन

मनोज चंद्राकर ने अपने गांव की संपत्ति बेचकर चिल्हाटी में मकान बनाया था। वह अपने परिवार के साथ वहां रहते थे। 19 दिसंबर को वह अपने परिवार के साथ बलौदा स्थित अपने मूल निवास गए थे। 22 दिसंबर को वह बैंक के काम का हवाला देकर अकेले लौट आए थे।

पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और उसे न्यायालय में पेश किया। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक पल का गुस्सा और नशे की स्थिति में लिया गया गलत निर्णय किसी के जीवन को समाप्त कर सकता है।


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