CG : तांत्रिक के कहने पर जिंदा चूजा निगलने से युवक की दम घुटने से मौत , पोस्टमार्टम करने दौरान हुआ मामले का खुलासा , डॉ. ने कहा- पहली बार देखा ऐसा मामला.....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। एक तांत्रिक के कहने पर अंधविश्वास में डूबे युवक ने जिंदा चूजा निगल लिया, जिससे उसकी जान चली गई। यह मामला सिर्फ विचित्र ही नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तांत्रिक प्रथाओं के खतरनाक प्रभावों का भी काला चेहरा दिखाता है। 

 

5 साल बाद मिला बेटा, फिर भी तांत्रिक के चक्कर में फंसा परिवार 

आनंद यादव, जो कि अंबिकापुर का निवासी था, को शादी के पांच साल बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी। संतान प्राप्ति से पहले उसका परिवार एक तांत्रिक के संपर्क में था, और इस चमत्कार का श्रेय उन्होंने उस तांत्रिक को दिया। बेटे के जन्म के बाद भी तांत्रिक की सलाह और उपायों को मानना उनके परिवार के लिए एक आदत बन गई।  

सूत्रों के अनुसार, आनंद फिर से तांत्रिक के पास गया, जहां उसे एक विचित्र और भयावह टोटका करने को कहा गया। तांत्रिक ने उसे जिंदा चूजा निगलने का आदेश दिया। तांत्रिक ने इसे "भाग्य को मजबूत" और "संकटों का अंत" करने का उपाय बताया। बिना सोचे-समझे और परिणामों की परवाह किए बिना, आनंद ने यह काम कर दिया।  

अंधविश्वास के चक्कर में गई जान

टोटका करने के कुछ देर बाद आनंद को चक्कर आने लगे और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। जब उसे अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के पीछे का रहस्य तब खुला जब पोस्टमॉर्टम किया गया।  

डॉक्टर संतू बाघ, जो आनंद का पोस्टमॉर्टम कर रहे थे, ने बताया कि जब सीने, पेट और सिर की जांच के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ, तो उन्होंने गले की जांच शुरू की। वहां उन्हें जो दिखा, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। आनंद के गले में जिंदा निगला गया एक चूजा U-शेप में फंसा हुआ था।  

चूजे का सिर आहार नली में और पैर स्वसन नली में फंसा हुआ था। डॉक्टरों का मानना है कि दम घुटने की वजह से आनंद की मौत हुई।  

15,000 पोस्टमॉर्टम के बाद भी ऐसा मामला पहली बार

डॉ. बाघ ने कहा, अपने पूरे करियर में मैंने 15,000 से ज्यादा पोस्टमॉर्टम किए हैं, लेकिन ऐसा विचित्र मामला पहली बार देखा। यह एक चेतावनी है कि किस तरह अंधविश्वास और तांत्रिकों के चक्कर में लोगों की जान जा रही है। 

समाज के लिए एक सबक 

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और कुप्रथाओं की भयावहता को उजागर किया है। तांत्रिकों और झाड़-फूंक में विश्वास करने के बजाय, विज्ञान और तर्क पर भरोसा करना आज के समय की मांग है। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के उन हिस्सों की सच्चाई है, जो अभी भी तांत्रिकों और झूठे उपायों पर यकीन करते हैं। अब समय आ गया है कि ऐसे अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाए और लोगों को शिक्षित किया जाए ताकि किसी और की जान इस तरह न जाए।  

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