घटना का खुलासा कैसे हुआ?
2 नवंबर को प्रेमलाल साहू की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्हें लगातार दस्त की समस्या हो रही थी, जिसके चलते उन्हें राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उन्होंने बताया कि दूध पीने के बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी थी। इलाज के दौरान 12 नवंबर को उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिली पुख्ता जानकारी
परिजनों ने संदेह जताते हुए बिलाईगढ़ थाने में 20 नवंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू की। रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि प्रेमलाल की मौत जहर से हुई है।
बहू ने स्वीकारा जुर्म
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की 40 वर्षीय बहू मीना साहू को हिरासत में लिया। पूछताछ में मीना ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसका पति गौरीशंकर साहू दिल्ली में रहता है। मीना को लगता था कि उसके ससुर उसे गांव लौटने से रोकते हैं। इसी गुस्से और नाराजगी में उसने ससुर को रास्ते से हटाने की साजिश रची। उसने प्रेमलाल के दूध में चूहा मारने की दवा मिलाई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने 23 दिसंबर को मीना साहू को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 103 के तहत जेल भेज दिया गया। इस मामले की जांच में टीआई प्रमोद यादव, प्रकाश रजक, भंवर काटले और अन्य पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई।

