यमराज से लड़ने वाला पति : पत्नी की जान बचाने घर को ही बना दिया ICU , 4 साल से हर दिन 15 किलोमीटर पैदल चल कंधों पर ढो रहा सिलेंडर....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बिहार भागलपुर के एक छोटे से गांव रसलपुर में रहने वाले विजय मंडल ने सच्चे प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती। उनका कहना है, छोड़ेंगे न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक, और वह इस वादे को पूरी तरह निभा रहे हैं।  

बीमारी ने बदली ज़िंदगी, लेकिन न बदला साथ देने का वादा  

विजय की पत्नी अनिता देवी चार साल से गंभीर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रही हैं। कोरोना काल के दौरान हुए संक्रमण ने उनके फेफड़ों को ऐसा नुकसान पहुंचाया कि उन्हें सांस लेने के लिए हमेशा ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। अनिता की हालत इतनी नाजुक है कि एक मिनट भी ऑक्सीजन के बिना रहना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, लेकिन विजय ने हार नहीं मानी।  

कंधे पर सिलेंडर, दिल में उम्मीद  

विजय ने अपनी पत्नी की देखभाल के लिए घर को ही एक छोटे ICU में बदल दिया है। तीन किलोमीटर दूर से सिलेंडर लाने के लिए वह दिन में तीन बार पैदल जाते हैं। यह सिलेंडर पहले रसलपुर से कहलगांव, फिर भागलपुर और अंत में ऑक्सीजन प्लांट तक पहुंचता है। इस पूरी प्रक्रिया में विजय हर दिन 15 किलोमीटर का सफर करते हैं। इस मेहनत ने उनके कंधों पर गांठ डाल दी है, लेकिन उनके हौसले को कमजोर नहीं कर पाई।  

हम मर्द होकर यमराज से क्यों न लड़ें?

विजय कहते हैं, जब सावित्री अपने पति को यमराज से छीन लाई थीं, तो मैं मर्द होकर अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए क्यों नहीं लड़ सकता? उनकी इस सोच ने उन्हें हर मुश्किल का सामना करने की ताकत दी है।  

10 लाख रुपए खर्च, लेकिन प्रेम अमूल्य  

विजय और अनिता का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पत्नी की बीमारी में 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। बेटी की शादी के लिए जो पैसा बचाया गया था, वह भी इलाज में लग गया। फिर भी विजय ने कभी शिकायत नहीं की। उनके बच्चे छोटे-मोटे काम करके परिवार का गुजारा कर रहे हैं।  

भगवान ऐसा पति सबको दे"  

अनिता देवी कहती हैं, भगवान ऐसा पति सबको दे। मेरे लिए वह भगवान ही हैं। गांव और इलाके के लोग विजय की इस लगन और समर्पण की खूब सराहना कर रहे हैं।  

उम्मीद की किरण  

विजय मंडल ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। वह चाहते हैं कि उनकी पत्नी का इलाज बेहतर तरीके से हो सके। उनका समर्पण न केवल एक प्रेरणा है, बल्कि यह समाज को प्रेम और सेवा का असली मतलब समझाता है। 

प्रेम की अद्भुत कहानी  

आज के समय में जहां रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर टूट रहे हैं, विजय और अनिता की कहानी एक बेमिसाल उदाहरण है। विजय का कहना है, एक पंछी मेरा प्यासा है, इसी हवा के लिए मैं हर दिन दौड़ता हूं। यह प्रेम की वह अनमोल गाथा है, जो हर किसी के दिल को छू जाती है।