बाल न्यायालय (सेशन जज) की न्यायाधीश दीपा गुर्जर ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दोषियों को बिना किसी पारिश्रमिक के अस्पताल के वार्डों और रसोईघर की सफाई करनी होगी। उन्हें प्रत्येक सप्ताह न्यूनतम 30 घंटे कार्य करना होगा, जिसकी निगरानी सीएमएचओ करेंगे और प्रत्येक तीन माह में इसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करेंगे। दोनों दोषियों को 10 फरवरी को अदालत में उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
मामले की पृष्ठभूमि : बगड़ थाना क्षेत्र में 7 मई 2020 को संदीप कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, तीन बिना नंबर की गाड़ियां शराब की दुकान पर आकर रुकीं। इनमें सवार बदमाशों ने न केवल दुकान में तोड़फोड़ की, बल्कि फायरिंग कर गल्ले से करीब डेढ़ लाख रुपये भी लूट लिए। इस दौरान एक वैन को भी क्षति पहुंचाई गई।
जांच के बाद पुलिस ने दोनों नाबालिगों को हिरासत में लेकर किशोर न्याय बोर्ड, झुंझुनू में चालान पेश किया, जहां से मामला बाल न्यायालय को सौंप दिया गया। राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक भारत भूषण शर्मा ने 25 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 205 दस्तावेज प्रस्तुत किए। अदालत ने डकैती के आरोप से दोनों को मुक्त कर दिया, लेकिन हमले और तोड़फोड़ का दोषी मानते हुए यह विशेष सजा सुनाई।

