ऐसे शुरू हुई ठगी की कहानी
दुर्ग के रिसाली इलाके में रहने वाली खुशबू ने अप्रैल 2022 में पुणे जाकर पढ़ाई शुरू की। उसी दौरान मोहल्ले का रहने वाला शौर्यजीत साहू भी पुणे में पढ़ाई के लिए गया था। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। खुशबू अक्सर अपने माता-पिता से बात करती और छुट्टियों में घर आती थी, जिससे किसी को शक नहीं हुआ।
जुलाई 2023 में खुशबू ने अपनी मां को फोन कर बताया कि उसने पुणे की पढ़ाई छोड़कर इंदौर के रिनाईनंस कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स में एडमिशन लिया है। उसने एडमिशन प्रोसेस के लिए मां की तीन महीने की सैलरी स्लिप, आधार कार्ड, पैन कार्ड और पिता का रेलवे आईडी कार्ड मांगा।
मोबाइल डेटा का हुआ दुरुपयोग
घर आने-जाने के दौरान शौर्यजीत ने खुशबू की मां के मोबाइल का पूरा डेटा अपने फोन में ट्रांसफर कर लिया। इसके अलावा जो भी ओटीपी आया, उसे फाइनेंस कंपनी को बता दिया। जब मां ने इस पर सवाल उठाया, तो खुशबू ने बहाना बनाते हुए कहा कि यह सब कॉलेज के काम के लिए किया गया है।
लोन का खेल और खुलासा
कुछ महीनों तक माता-पिता को लोन की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन जब ईएमआई नहीं जमा हुई, तो बैंक और फाइनेंस कंपनियों से कॉल और मैसेज आने शुरू हो गए। खुशबू की मां ने देखा कि उनकी सैलरी अकाउंट से लोन की किस्तें कट रही हैं। जब उन्होंने बेटी से पूछा, तो खुशबू ने गुमराह करते हुए इसे ट्रेडिंग कंपनी का मैसेज बताया।
पिता को संदेह हुआ, तो उन्होंने अपने छोटे भाई को मैसेज दिखाकर जानकारी मांगी। चंद्रप्रकाश ध्रुव ने बताया कि उनके नाम पर लोन लिया गया है। तभी यह राज खुला कि खुशबू ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर यह साजिश रची है।
प्रेमी ने पिता के खाते में ट्रांसफर किए पैसे
जांच के दौरान पता चला कि शौर्यजीत साहू ने खुशबू के माता-पिता और मामा के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से लोन लिया। इसके बाद उसने 41 लाख 98 हजार रुपए अपने पिता योगेश साहू के खाते में ट्रांसफर कर दिए। फिर इस रकम को नकद निकाल लिया गया।
पिता ने बेटी से तोड़ा नाता
ठगी की घटना के बाद पिता ने अपनी बेटी से पूरी तरह नाता तोड़ लिया। उन्होंने बेटी और उसके प्रेमी के खिलाफ नेवई थाने में शिकायत दर्ज कराई। अब पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पारिवारिक विश्वास को लगा गहरा झटका
रेलवे कर्मचारी पिता और लेक्चरर मां के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं है। परिवार को यह समझ नहीं आ रहा कि उनकी बेटी, जिस पर उन्होंने पूरा भरोसा किया था, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया।
इस घटना ने यह संदेश दिया है कि डिजिटल युग में दस्तावेजों और निजी जानकारी की सुरक्षा कितनी जरूरी है। धोखाधड़ी के ऐसे मामलों से बचने के लिए सतर्क रहना अनिवार्य है।
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