ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया कि कई मेडिकल दुकानों में बिना फार्मासिस्ट डिग्री के कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा, कुछ दुकानों में किराए पर फार्मासिस्ट डिग्री लेकर दुकान चलाने का चलन है। इन अवैध दुकानों के अलावा, बिना लाइसेंस के क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब्स भी धड़ल्ले से चल रही हैं।
अनुरूध वर्मा (अनिरुध) ने कहा, “अवैध तरीके से चल रहे क्लीनिक और चिकित्सा सेवाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कई झोला छाप डॉक्टर बिना किसी डर के मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है|
स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी, आर. के. खंडेलवाल ने कहा, “यह सच है कि बिना लाइसेंस के क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब संचालित नहीं किए जा सकते। हम इस पर कड़ी कार्रवाई करेंगे और किसी को भी अवैध रूप से चिकित्सकीय सेवाएं देने की अनुमति नहीं दी जाएगी|
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नर्सिंग होम केयर सर्विस भी अवैध रूप से संचालित हो रही है, जबकि नर्सिंग होम एक्ट के तहत इस प्रकार की सेवाओं के संचालन के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। बावजूद इसके, ये सेवाएं बिना किसी रोक-टोक के चल रही हैं।
अजीत जोगी युवा मोर्चा के सदस्यों ने नोडल अधिकारी से अवैध क्लीनिकों और मेडिकल सेवाओं पर कार्रवाई की सख्त मांग की। आर. के. खंडेलवाल ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रेम साहू, आशिक हुसैन, कमलेश निर्मलकर सहित अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

