कार्यक्रम का उद्देश्य: संस्कृति और धर्म को बचाना
आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए कहा,
आज के युग में जब धर्म और संस्कृति खतरे में हैं, तब वैदिक यज्ञ के माध्यम से परिवारों को अपनी परंपराओं से जोड़ने की पहल बेहद आवश्यक हो गई है। जब तक हम अपनी आने वाली पीढ़ी को धर्म और रीति-रिवाजों से नहीं जोड़ेंगे, तब तक सनातन संस्कृति को बचाना मुश्किल होगा।
यज्ञ, जो वैदिक धर्म का मूल आधार है, न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसे पर्यावरण शुद्धिकरण और वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
1. घर-घर यज्ञ का आयोजन:
इच्छुक व्यक्ति अपने घर में यज्ञ करवा सकते हैं। आर्य समाज की ओर से सभी व्यवस्थाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी:
- हवन सामग्री
- समिधा
- माइक इत्यादि
2. यज्ञ के लाभ:
पंडित अंकित शर्मा शास्त्री ने कहा,
यज्ञ न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है। यह पर्यावरण को शुद्ध करता है और अंधविश्वास तथा पाखंड से कोसों दूर है।
3. यज्ञ का महत्व:
कार्यक्रम के संयोजक मनोज ठाकरे ने बताया,
यज्ञ को गीता में श्रेष्ठतम कर्म कहा गया है। वैदिक यज्ञ की सरल प्रक्रिया को समझाकर इसे हर घर तक पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है।
संपर्क जानकारी
जो भी इस अद्भुत पहल में शामिल होना चाहते हैं, वे निम्न संपर्क नंबरों पर समय, तिथि और स्थान निश्चित कर सकते हैं:
- अवनी भूषण पुरंग: 079998 18951
- मनोज ठाकरे: 9300540698
- प्रवीण गुप्ता: 079743 79398
आर्य समाज मंदिर, भिलाई, सभी सनातन धर्म प्रेमियों से आग्रह करता है कि वे इस यज्ञ और वेद प्रचार अभियान का हिस्सा बनें। यह न केवल हमारी संस्कृति और धर्म को सहेजने का एक प्रयास है, बल्कि इसे घर-घर पहुंचाने का एक महान अवसर भी है।

