CG : आदिवासी बेटियों की सुरक्षा पर गहराता संकट: फेरीवाले बन आते हैं बिछाते है जाल ,बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं व बाहरी नेटवर्क से जुड़े है तार ,संदिग्धों से मिले दस्तावेज , 260 से अधिक लड़कियां हो चुकी है शिकार....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : कोंडागांव पुलिस को कुछ संदिग्धों के पास से ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो बस्तर की आदिवासी लड़कियों को फंसाने के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की ओर इशारा करते हैं। यह खुलासा हुआ है कि इन घटनाओं के तार बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय से जुड़े हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ में बस्तर और अन्य क्षेत्रों की लड़कियों को बहला-फुसलाकर मुंबई, बिहार, उत्तर प्रदेश और यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के पीओके तक ले जाया जा रहा है। पुलिस की स्पेशल टीम ने कुछ ऐसे संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिन पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या होने का संदेह है। जांच में यह भी सामने आया कि राज्य के बाहर के कुछ खास समुदाय के युवक इस मामले में शामिल हो सकते हैं।

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन संदिग्धों के पास से स्थानीय लड़कियों के मोबाइल नंबर, फोटो और वीडियो की बड़ी संख्या बरामद हुई है। भास्कर की जांच में यह भी पता चला है कि कोंडागांव की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम ने नाइट चेकिंग के दौरान टोल नाके पर तीन संदिग्धों को पकड़ा। इनकी पहचान अलामित शेख (55) जिला दिनाजपुर, शफीकुर (33) और टोपाइल शेख (24) बोगरा, बांग्लादेश के रूप में हुई। इनके पास बांग्लादेश की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज मिले हैं, जिनकी पुष्टि की जा रही है। टोपाइल ने बस्तर-ओडिशा सीमा की एक स्थानीय लड़की से शादी की है।

सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष यतींद्र छोटू सलाम ने कहा कि ऐसे मामले पूरे बस्तर में फैले हुए हैं। इस वजह से बस्तर में आने वाले हर बाहरी व्यक्ति की जांच जरूरी हो गई है। स्थानीय बेटियों की सुरक्षा के लिए सर्व आदिवासी समाज ने 7 दिसंबर को कोंडागांव बंद रखा, जिसमें स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने भी सहयोग किया। इस दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने वहां पहुंचकर समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा की और एसपी-कलेक्टर को स्कूल और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया।

जांच में यह भी पता चला है कि संदिग्ध लोग फेरीवाले, टाइल्स मिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन और कबाड़ी के रूप में आकर लोगों से पहचान बढ़ाते हैं और लड़कियों के मोबाइल नंबर हासिल कर लेते हैं। ये नंबर बाद में बाहरी नेटवर्क को भेज दिए जाते हैं, जिसके बाद रॉन्ग कॉल का सिलसिला शुरू हो जाता है। पुलिस ने बताया है कि अभी तक 260 से अधिक लड़कियां इस जाल में फंस चुकी हैं।

भास्कर की रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि बाहरी मुस्लिम युवक आदिवासी लड़कियों से शादी कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान प्राप्त कर रहे हैं। आदिवासी क्षेत्र में केवल आदिवासी लोग ही जमीन खरीद सकते हैं, इसलिए यह जमीन लड़कियों के नाम पर खरीदी जा रही है। इन संदिग्धों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे दस्तावेज भी मिले हैं।

एसपी अक्षय कुमार ने बताया कि बाहरी युवक स्थानीय लड़कियों का भरोसा जीतकर उनसे चैट और कॉल का स्क्रीनशॉट मांगते हैं। इन स्क्रीनशॉट्स में दर्ज नंबरों पर रॉन्ग कॉल किए जाते हैं, जिससे अन्य लड़कियों का भी नंबर लीक हो जाता है।

एक हैरान करने वाला मामला 16 साल के फैजल का है, जिसे नहीं पता कि वह हिंदू है या मुस्लिम। युवती ने बताया कि शेख अली नामक युवक से उसकी शादी हुई थी। उसने शेख अली के रिवाज तो अपनाए, लेकिन अपना धर्म नहीं बदला। कुछ समय बाद शेख अली ने मारपीट और पैसे मांगना शुरू कर दिया। रोशनी अपनी मां के पास लौट आई, लेकिन उसका बेटा अभी भी मुस्लिम नाम के साथ जीने को मजबूर है।

कोंडागांव पुलिस ने बस्तर की एक लड़की को पीओके से बचाने के लिए वहां तक पहुंच बनाई। दो साल पहले कोंडागांव-जगदलपुर सीमा पर पकड़े गए कुछ फेरीवालों के पास बस्तर की पांच लड़कियों के नंबर पाए गए थे। पुलिस अब इन संदिग्ध गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए अभियान चला रही है।

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