भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : (छग ) बीजापुर। पत्रकारिता की आवाज़ को दबाने का एक और मामला सामने आया है। तीन दिनों से लापता पत्रकार मुकेश चंद्राकर की लाश चट्टानपारा इलाके में ठेकेदार के परिसर स्थित सेप्टिक टैंक में मिली। घटनास्थल उनके घर से मात्र 2 किमी और बीजापुर थाने से 5 किमी की दूरी पर है। इस घटना से पत्रकारिता जगत में गहरा आक्रोश है।
गुमशुदगी से हत्या तक: क्या हुआ?
1 जनवरी की शाम, मुकेश चंद्राकर टी-शर्ट और शॉर्ट्स में घर से निकले और उसके बाद उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। रातभर उनका परिवार और भाई युकेश चंद्राकर उन्हें ढूंढते रहे। कोई जानकारी न मिलने पर उन्होंने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। यह भी बात सामने आई है की सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर करने पर हुआ था उनका ठेकेदार से विवाद हुआ था |
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। आईजी सुन्दरराज पी ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि एक टीम दिल्ली रवाना की गई थी और एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी।
लाश पर चोट के गंभीर निशान
पुलिस द्वारा किए गए पंचनामे में यह स्पष्ट हुआ कि मुकेश चंद्राकर की हत्या बेहद बेरहमी से की गई।
- सिर पर सात जगह नुकीले हथियार से वार।
- माथे पर कुल्हाड़ी के गहरे निशान
- गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि।
मुख्य आरोपी और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने इस हत्याकांड में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के भाई को गिरफ्तार किया है। वहीं, अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
पत्रकारों में गुस्सा और न्याय की मांग
मुकेश चंद्राकर की हत्या ने बीजापुर समेत पूरे राज्य में पत्रकारों के बीच गुस्सा फैला दिया है। उन्होंने दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। पत्रकार संगठनों ने सरकार से स्वतंत्र पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने का आह्वान किया है।
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