उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तकनीकी शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन करके उपयुक्त नीति तैयार की जाए। इस निर्देश के तहत विभाग ने एक नीति का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे शीघ्र ही राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य युवाओं को उनके विचारों और नवाचारों के माध्यम से स्थायी और समावेशी विकास की दिशा में प्रेरित करना है। योजना के तहत 2025 से 2029 तक के पांच वर्षों में 50,000 से अधिक छात्रों को नवाचार और उद्यमिता के प्रति जागरूक किया जाएगा।
तकनीकी और वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी इस नीति के अंतर्गत, 500 छात्र-नेतृत्व वाले "प्रूफ ऑफ कांसेप्ट" को सहायता दी जाएगी, 500 बौद्धिक संपदा (आईपी) दायर करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, और 250 स्टार्टअप इनोवेटर्स को आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि "प्रूफ ऑफ कांसेप्ट" का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी विचार या सिद्धांत को वास्तविक व्यावसायिक परिदृश्यों में लागू किया जा सकता है या नहीं। यह परीक्षण परियोजना या उत्पाद में समय और संसाधन लगाने की संभावना का मूल्यांकन करता है।
वार्षिक बजट का प्रावधान इस नीति के तहत राज्य सरकार नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक वार्षिक बजट निर्धारित करेगी। प्रूफ ऑफ कांसेप्ट के विकास के लिए अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, प्रोटोटाइप या न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) और उत्पाद विकास के लिए 10 लाख रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाएगा। लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से दी जाएगी।
समिति और एजेंसी का गठन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर एक सर्वोच्च समिति (एसएलएसी) और नीति कार्यान्वयन समिति (पीआईसी) का गठन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। यह एजेंसी नीति के क्रियान्वयन और उसकी निगरानी का दायित्व संभालेगी।
पीएमयू समय-समय पर लाभार्थियों की प्रगति की समीक्षा करेगा और संतोषजनक प्रगति के आधार पर ही धनराशि जारी की जाएगी।
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