दुर्ग : महिला गांजा तस्कर की 40 लाख की अवैध संपत्ति फ्रीज, गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी पुलिस कार्यवाही...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दुर्ग जिले में पहली बार, अवैध रूप से गांजा बिक्री कर अर्जित 40 लाख रुपये की संपत्ति को सफेमा/एनडीपीएस मुंबई द्वारा फ्रीज करने का आदेश जारी किया गया है। इसमें आरोपियों की भूमि, निर्माणाधीन मकान, बैंक में जमा राशि, मोटरसाइकिल बुलेट, स्कूटी एक्टिवा और नकद राशि शामिल हैं। यह कार्रवाई मोहन नगर पुलिस द्वारा की गई।


उप पुलिस अधीक्षक अजय सिंह (रा.पु.से.) ने बताया कि 23 दिसंबर 2024 को मुखबिर से सूचना मिली कि तितुरडीह, दुर्ग निवासी सुमन बारले (पाण्डेय) अपने किराए के मकान में गांजा संग्रह कर उसकी बिक्री कर रही है। इस पर निरीक्षक शिव प्रसाद चन्द्रा (थाना प्रभारी, मोहन नगर) और निरीक्षक विजय यादव (थाना प्रभारी, दुर्ग) के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच की गई। मौके पर सुमन बारले, उसके पति शैलेन्द्र पाण्डेय और उसकी नाबालिग बहन मौजूद थे।

मकान की तलाशी के दौरान 08 पैकेटों में पैक किया हुआ कुल 16.782 किलोग्राम गांजा और 68,200 रुपये नकद बरामद किए गए। पूछताछ में सुमन बारले ने बताया कि उसके पिता संतोष बारले, बहन दीपाली बारले, दादी रामबाई बारले और नाबालिग भाई कई वर्षों से गांजा और शराब की अवैध बिक्री में संलिप्त हैं। इस अवैध कमाई से उन्होंने मोटरसाइकिल बुलेट, एक्टिवा, सोने-चांदी के गहने और तितुरडीह में नजूल भूमि खरीदी, जिस पर निर्माणाधीन मकान बनाया जा रहा था।

सुमन बारले, शैलेन्द्र पाण्डेय, दीपाली बारले, रामबाई बारले, संतोष बारले और दो नाबालिगों के खिलाफ अपराध क्रमांक 660/2024 के तहत धारा 20(ख), 27(क) एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। अवैध रूप से अर्जित धन से खरीदी गई संपत्ति को धारा 68 एफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सफेमा कोर्ट, मुंबई को 21 जनवरी 2025 को रिपोर्ट भेजी गई। कोर्ट ने आरोपियों को संपत्ति के स्रोत पर जवाब देने का नोटिस भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

इसके बाद सफेमा कोर्ट ने 68,200 रुपये नकद, तितुरडीह की नजूल भूमि और निर्माणाधीन मकान (अनुमानित मूल्य 30 लाख रुपये), बैंक में जमा 6,55,252 रुपये, बुलेट मोटरसाइकिल (मूल्य 1 लाख रुपये) और एक्टिवा स्कूटी (मूल्य 50,000 रुपये) सहित कुल लगभग 40 लाख रुपये की संपत्ति को फ्रीज करने का आदेश दिया।

इस कार्रवाई में उप निरीक्षक पारस सिंह ठाकुर, सहायक उप निरीक्षक राजेन्द्र देशमुख, राजेश पाण्डेय और मोहन नगर थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।