भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर में पहली बार एक नई सुविधा शुरू होने जा रही है, जिसके तहत सभी ऑटो, ई-रिक्शा और यात्री बसों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। ये कोड वाहन के अंदर और बाहर चिपकाए जाएंगे। इन्हें स्कैन करके यात्री या अन्य व्यक्ति सड़क दुर्घटना, नो पार्किंग में खड़े वाहनों से होने वाले ट्रैफिक जाम और वाहन की लाइव लोकेशन की सूचना दे सकेंगे।
इस क्यूआर कोड में वाहन का नंबर, मालिक का नाम और फोन नंबर उपलब्ध रहेगा। इसके अतिरिक्त, इसमें मालिक के एक परिजन का संपर्क नंबर भी जोड़ा जाएगा ताकि किसी दुर्घटना या अन्य आपात स्थिति में उनसे संपर्क किया जा सके। खास बात यह है कि वाहन मालिकों को इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह अत्याधुनिक प्रणाली लागू करने वाला रायपुर छत्तीसगढ़ का पहला शहर बनने जा रहा है। अगले एक महीने में इसका पहला चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें सवारी वाहनों पर यह सुविधा दी जाएगी और बाद में इसे निजी वाहनों में भी लागू किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई है। इस सिस्टम को 'मोर रायपुर टैग' नाम दिया गया है, जिसे 'मोर रायपुर' एप के जरिए उपयोग किया जा सकेगा। एप के माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन कर लोग संबंधित सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। यह टैग शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, मॉल और पार्किंग स्थलों में खड़े वाहनों पर भी लगाया जाएगा। इसके क्रियान्वयन में स्मार्ट सिटी की तकनीकी टीम पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी।
क्यूआर कोड से मिलने वाले फायदे:
1. वाहन मालिक को तुरंत सूचना: यदि कोई वाहन किसी के घर के सामने खड़ा है और आने-जाने में बाधा बन रहा है, तो 'मोर रायपुर' एप के माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर वाहन मालिक से संपर्क किया जा सकेगा और उसे हटाने का अनुरोध किया जा सकेगा।
2. सड़क दुर्घटना की जानकारी: क्यूआर कोड स्कैन करने पर तीन विकल्प मिलेंगे:
- विकल्प A:यदि कोई वाहन नो पार्किंग क्षेत्र में खड़ा है, तो इस विकल्प को चुनकर वाहन मालिक को इसकी सूचना भेजी जा सकेगी। इससे उन्हें पता चल जाएगा कि उनकी गाड़ी की वजह से रास्ता बाधित हो रहा है।
- विकल्प B: यदि किसी दुर्घटना की सूचना देनी हो, तो इसे चुनकर वाहन मालिक और उनके परिजन को दुर्घटना की जानकारी दी जा सकेगी, जिससे वे आवश्यक सहायता भेज सकें।
- विकल्प C: महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विकल्प के तहत वे अपनी लाइव लोकेशन, वाहन नंबर, मालिक का नाम और ड्राइवर की जानकारी परिजनों या परिचितों को भेज सकेंगी।
ट्रैफिक पुलिस की सहायता:
4. नो-पार्किंग में उठाए गए वाहनों की जानकारी: इसमें एक अतिरिक्त विकल्प D जोड़ने की योजना है, जिसके तहत यदि ट्रैफिक पुलिस किसी वाहन को क्रेन से उठाकर ले जाती है, तो वाहन मालिक एक क्लिक में उसकी जानकारी प्राप्त कर सकेगा। पुलिस द्वारा उठाई गई गाड़ियों की जानकारी एप में तुरंत अपडेट की जाएगी।
बाहरी वाहनों पर भी यह लागू होगा:
यह क्यूआर कोड सिर्फ रायपुर के वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शहर में प्रवेश करने वाले अन्य राज्यों के वाहनों पर भी इसे लागू किया जाएगा। यह फास्टैग की तरह काम करेगा, और स्कैन करने के लिए मोबाइल पर एप डाउनलोड करना आवश्यक होगा।
ट्रायल सफल, जल्द होगी शुरुआत:
मोर रायपुर टैग' सिस्टम का ट्रायल पहले ही किया जा चुका है, जो सफल रहा है। अब जल्द ही इसे सवारी वाहनों में लागू किया जाएगा। इस दौरान स्मार्ट सिटी की तकनीकी टीम और पुलिस मिलकर कार्य करेंगी। इस सिस्टम में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
गुरजीत सिंह, डीएसपी ट्रैफिक
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