भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : (छग) जशपुर पुलिस के 'ऑपरेशन आघात' के तहत एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ट्रक से 700 पेटी विदेशी शराब जब्त की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है, जबकि पूरे मामले में एक बड़े तस्करी सिंडिकेट के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जशपुर पुलिस को गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि एक 12 चक्का अशोका लीलैंड ट्रक (नंबर PB 11CP2003) में अवैध शराब लोड कर पंजाब से झारखंड और बिहार की ओर ले जाया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में पुलिस टीम ने ट्रक का पीछा किया। जब ट्रक दुलदुला थाना क्षेत्र के लोरो घाट के पास सरदार ढाबे के समीप पहुंचा, तो पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर उसे रोक लिया।
जांच के दौरान ट्रक में ऊपर से सीमेंट की 100 से अधिक बोरियां लदी हुई थीं, जिन्हें इस प्रकार व्यवस्थित किया गया था कि शराब के कार्टून पूरी तरह छिपे रहें और बाहर से किसी को भी इसकी भनक न लगे। पुलिस ने जब सभी बोरियों को हटाकर ट्रक की गहन तलाशी ली, तो 228 कार्टून में अंग्रेजी शराब की बोतलें, 299 कार्टून में अध्धे और 263 कार्टून में पौवे पाए गए।
कुल मिलाकर 790 कार्टून में 22,536 बोतलें मिलीं, जिनमें 7015 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब मौजूद थी। बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर आरोपी चालक श्रवण सिंह (43 वर्ष), निवासी चंबा, थाना श्रेहाली, जिला सरनताल (पंजाब) को हिरासत में ले लिया है।
पूछताछ में आरोपी चालक ने बताया कि वह जालंधर, पंजाब से हजारीबाग, झारखंड तक ट्रक लेकर जा रहा था। जब उससे शराब की लोडिंग के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। तस्करों की एक विशेष टीम लोड किए हुए ट्रक को जालंधर (पंजाब) में उसे सौंप देती थी, जिसे वह हजारीबाग, झारखंड लेकर जाता था।
वहां तस्करों का दूसरा समूह ट्रक को अपने कब्जे में ले लेता और उसे किसी अज्ञात स्थान पर खाली कर देता। बाद में खाली ट्रक को फिर से चालक को लौटा दिया जाता था और उसे बैग में भरे पैसे देकर वापस भेज दिया जाता था। जालंधर पहुंचने पर एक और तस्कर समूह उससे ट्रक और नकदी लेकर चला जाता था।
इस पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि आरोपी चालक को यह जानकारी नहीं थी कि शराब कहां से लोड हुई और कहां अनलोड की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित तस्करी गिरोह का हिस्सा है। पुलिस इस अंतरराज्यीय गिरोह की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही इसके अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
जांच में यह भी सामने आया है कि तस्कर ऐसे मार्गों का उपयोग करते थे, जहां टोल नाके कम होते और पुलिस चेकिंग से बचा जा सके। इसलिए वे ग्रामीण पक्की सड़कों से होकर शराब की तस्करी करते थे। जांच में पाया गया कि आरोपी चालक ने 13 फरवरी को जालंधर से यात्रा शुरू की थी और अब तक 1571 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका था।
इसके अलावा, तस्कर शराब की बोतलों के होलोग्राम और बैच नंबरों को पहले ही मिटा देते थे ताकि पकड़े जाने की संभावना न रहे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने यह भी बताया कि यह गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है। पुलिस अब आरोपी चालक के मोबाइल की जांच कर रही है, जिससे इस सिंडिकेट में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके। साइबर सेल की मदद से पुलिस इस पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच करेगी।
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