भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पेशल कोर्ट में 3,841 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा समेत 21 अन्य व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को निर्धारित की गई है।
ED की चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि कवासी लखमा को इस शराब घोटाले की पूरी जानकारी थी और उन्होंने आबकारी नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। छत्तीसगढ़ डिस्टलरी को 48%, भाटिया वाइन मर्चेंट को 28% और वेलकम डिस्टलरी को 24% शराब आपूर्ति का कार्य सौंपा गया था। इस भ्रष्टाचार के जरिए हर महीने लखमा को 1.50 करोड़ रुपये की अवैध कमाई होती थी। आरोप है कि वे सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बदले 50 लाख रुपये तक की रिश्वत वसूलते थे। यह धनराशि विभिन्न माध्यमों से सिंडिकेट से जुड़े लोगों द्वारा पहुंचाई जाती थी। कांग्रेस सरकार के शासनकाल में तीन वर्षों तक यह भ्रष्टाचार चलता रहा, जिससे 36 महीनों में कुल 72 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को ED ने 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उनसे दो बार पूछताछ करने के बाद यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद ED ने उन्हें 7 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लिया और फिर 21 जनवरी से 4 फरवरी तक 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पिछली सुनवाई के दौरान जेल में सुरक्षा बलों की कमी के कारण उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई थी। इसके बाद अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 18 फरवरी तक बढ़ा दी थी।
इस घोटाले की शुरुआत तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और मुख्यमंत्री सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया के खिलाफ आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी और अवैध दलाली का बड़ा खेल चल रहा था। रायपुर के तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर इस अवैध वसूली का संचालन कर रहे थे। इस शिकायत के आधार पर ED ने 18 नवंबर 2022 को PMLA अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
ED की जांच के अनुसार, अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के माध्यम से आबकारी विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया। चार्जशीट में बताया गया कि 2017 में आबकारी नीति में संशोधन कर CSMCL के माध्यम से शराब बिक्री का प्रावधान किया गया था, लेकिन 2019 के बाद घोटाले के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का प्रबंध निदेशक नियुक्त कराया। इसके बाद अधिकारियों, व्यापारियों और राजनीतिक रसूखदार लोगों के गठजोड़ के माध्यम से 2161 करोड़ रुपये का यह घोटाला किया गया। इसी मामले में ED ने 15 जनवरी को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था।
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