भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : यूपी , प्रेम संबंध में बाधा बन रहे अपने पिता को रास्ते से हटाने के लिए एक बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर निर्मम हत्या कर डाली। मंगलवार को कुल्हाड़ी से हमला कर पिता की हत्या कर दी गई और घटना को दूसरी दिशा देने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने अगले ही दिन इस साजिश का खुलासा कर दिया। पुलिस ने मामले में बेटी के प्रेमी को भागने के प्रयास में सुभाष चौक से गिरफ्तार किया और दोनों को न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
घटना के तुरंत बाद बेटी ने हत्या के लिए गांव के कुछ लोगों पर जमीन विवाद का आरोप लगाया। पुलिस जांच के दौरान जब संदिग्धों से पूछताछ की गई तो उन्होंने हत्या में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया। उनके मोबाइल लोकेशन भी हत्या के समय दूसरी जगह मौजूद होने का प्रमाण दे रहे थे। इसके बाद पुलिस को बेटी दीपाली यादव पर संदेह हुआ और जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने सच स्वीकार कर लिया।
घटना सदर कोतवाली क्षेत्र के महुआबारी मोहल्ले में हुई, जहां 65 वर्षीय उदयभान यादव की उनके पुराने मकान की दूसरी मंजिल पर कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दी गई थी। मृतक के भाई धर्मेंद्र यादव ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई। एसपी विक्रांत वीर के निर्देश पर डॉग स्क्वाड, फॉरेंसिक टीम, एसओजी टीम, सर्विलांस टीम और कोतवाली पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर जांच का जिम्मा सौंपा गया।
बेटी ने पूछताछ में कबूला अपराध
जांच टीम ने सर्विलांस की मदद से घटना के समय घर में मौजूद लोगों की जानकारी प्राप्त की। मृतक की बेटी दीपाली यादव से पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने अपने प्रेमी विशेष कुमार उर्फ पवन गौंड, जो कि कोतवाली क्षेत्र के मुराडीह का निवासी है, के साथ मिलकर कुल्हाड़ी से पिता की हत्या कर दी थी। पुलिस ने शहर के सुभाष चौक से विशेष कुमार को गिरफ्तार किया और दोनों को बृहस्पतिवार को मेडिकल परीक्षण के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
बड़ी बेटी को चाचा ने घर में घुसने से रोका
घटना की सूचना मिलते ही संतकबीरनगर में कांस्टेबल पद पर तैनात बड़ी बेटी दीक्षा यादव गांव पहुंचीं। हत्या के बाद पुलिस ने मकान को सील कर दिया था और परिवार का कोई भी सदस्य वहां मौजूद नहीं था। मृतक के दोनों बेटे अपने चाचा के घर थे। जब दीक्षा वहां पहुंची, तो भाई की हत्या से व्यथित चाचा ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें समझाने की कोशिश की।
इस बीच दीक्षा ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस की सहायता मांगी। रात करीब 10:34 बजे उनकी कॉल आई, जिसमें उन्होंने अपना नाम दीक्षा यादव, पुत्री स्वर्गीय उदयभान यादव बताया। उन्होंने बताया कि उनके चाचा ने घर का ताला बंद कर दिया है और उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी बुआ के घर जाना चाहती हैं, जो गोरखपुर ओवरब्रिज के पास रहती हैं। इसके बाद पुलिस की पीआरवी 1456 टीम ने उन्हें सुरक्षित बुआ के घर पहुंचा दिया।
अगली सुबह दीक्षा अपने भाई और बुआ के साथ चाचा के घर लौटीं, जहां परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। चाचा ने बताया कि घटना के बाद उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। अचानक इतनी बड़ी घटना परिवार में हो जाएगी, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था। वह अपने भाई के ब्रह्मभोज की तैयारियों में व्यस्त थे और इसी कारण दीक्षा को घर में प्रवेश से रोका था।
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