भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भारत जल्द ही अपना स्वदेशी वेब ब्राउज़र लॉन्च कर सकता है। इसे विकसित करने की जिम्मेदारी भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो कॉरपोरेशन को दी गई है। इस पहल की घोषणा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने की। मंत्रालय ने 'भारतीय वेब ब्राउज़र विकास चुनौती' नामक प्रतियोगिता आयोजित की थी, जिसमें जोहो कॉरपोरेशन ने पहला स्थान हासिल किया। इस जीत के लिए कंपनी को 1 करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला है।
प्रतियोगिता में टीम पिंग दूसरे स्थान पर रही, जिसे 75 लाख रुपये मिले, जबकि तीसरे स्थान पर टीम अजना रही, जिसे 50 लाख रुपये का इनाम दिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सभी विजेताओं को चेक प्रदान किए और कहा कि यह गर्व की बात है कि प्रतियोगिता के विजेता छोटे शहरों से आ रहे हैं।
ब्राउज़र की विशेषताएँ
1. डेटा सुरक्षा: इस ब्राउज़र पर सरकार की निगरानी रहेगी और भारतीय डेटा देश के भीतर ही संरक्षित रहेगा।
2. प्राइवेसी सुरक्षा: मेड इन इंडिया ब्राउज़र डेटा प्राइवेसी नियमों का पालन करेगा और उपयोगकर्ताओं की जानकारी सुरक्षित रखेगा।
3. सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता: यह ब्राउज़र Windows, iOS और Android जैसे प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम पर सुचारू रूप से काम करेगा।
वेब ब्राउज़िंग में अमेरिकी कंपनियों का वर्चस्व
वर्तमान में, वेब ब्राउज़िंग के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा है। भारत में गूगल क्रोम का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है। देश में लगभग 850 मिलियन (85 करोड़) लोग गूगल क्रोम का उपयोग करते हैं, जो कुल इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का लगभग 89% है।
स्वदेशी ब्राउज़र के लिए 3 करोड़ रुपये की फंडिंग
सरकार ने इस मेड इन इंडिया ब्राउज़र के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये की फंडिंग का ऐलान किया है। इसके पूरा होने के बाद, इसे सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता इसे सुरक्षित रूप से इस्तेमाल कर सकेंगे।
स्वदेशी ब्राउज़र की आवश्यकता क्यों?
गूगल क्रोम, मोज़िला फायरफॉक्स जैसे मौजूदा ब्राउज़रों में भारतीय सर्टिफिकेशन एजेंसियों को शामिल नहीं किया जाता। रूट स्टोर, जिसे ट्रस्ट स्टोर भी कहा जाता है, यह तय करता है कि ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन कितने सुरक्षित हैं। लेकिन इन सर्टिफिकेशन में कोई भारतीय एजेंसी शामिल नहीं होती।
भारत में उपलब्ध मौजूदा ब्राउज़रों का देश की सरकार के साथ सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी को लेकर कोई समन्वय नहीं है। भारत तेजी से डिजिटल हो रहा है, ऐसे में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। यही कारण है कि देश को अपने स्वयं के वेब ब्राउज़र की आवश्यकता है।
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