बड़ी राहत! बस्तर अब नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर, बंद हुई केंद्रीय सहायता..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़बस्तर से बड़ी खबर आई है, जिसने पूरे इलाके में नई उम्मीद जगा दी है। अब बस्तर को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने मार्च 2025 तक आर्थिक सहायता देने के बाद एलडब्ल्यूई फंड भी पूरी तरह बंद कर दिया है।

बस्तर नक्सलमुक्त जिला घोषित, केंद्र सरकार ने LWE फंड किया बंद – बस्तर न्यूज़ फोटो
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बस्तर संभाग लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism - LWE) से प्रभावित रहा है। लेकिन अब इस दिशा में चल रही लगातार कोशिशों का असर दिखने लगा है। केंद्र ने बस्तर जिले को एलडब्ल्यूई जिलों की सूची से बाहर कर दिया है। हालांकि, अभी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

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अप्रैल 2025 से बंद हुई केंद्रीय मदद

नई वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार ने बस्तर को मिलने वाला करोड़ों का एलडब्ल्यूई फंड भी रोक दिया है। ये फंड अब तक जिले में नक्सल उन्मूलन और विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल हो रहा था।

बस्तर संभाग के 2 जिले नक्सलमुक्त घोषित
बस्तर संभाग में कुल 7 जिले हैं – बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर। इनमें से अब 2 जिले नक्सलमुक्त घोषित हो चुके हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के तीन और जिले – राजनांदगांव, कवर्धा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को भी LWE की सूची से बाहर किया गया है।

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जिन इलाकों से हटा नक्सलवाद

बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र में कोलेंग, तुलसीडोंगरी, माचकोट, तिरिया और लोहंडीगुड़ा जैसे इलाके पहले नक्सल प्रभावित माने जाते थे। लेकिन अब यहां सुरक्षा कैंपों और पुलिस थानों की स्थापना के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

🔹 कोलेंग, तुलसीडोंगरी और झीरम घाटी में दो-दो कैंप खोले गए हैं।
🔹 मारडूम में थाना और कैंप, चित्रकोट व ककनार में चौकी स्थापित की गई है।
🔹 लोहंडीगुड़ा में CRPF कैंप खुलने के बाद से इलाके में सुरक्षा और विकास की गति तेज हुई है।

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