छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का सख्त फैसला: गैंगरेप में एक ने किया अपराध, साथ देने वाले भी सभी दोषी!

भिलाई की पत्रिका न्यूज़सूरजपुर में गैंगरेप केस: हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती

(छग) बिलासपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सूरजपुर के बहुचर्चित गैंगरेप मामले में पांचों दोषियों को कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर समूह में एक व्यक्ति भी दुष्कर्म करता है और बाकी उसका साथ देते हैं, तो सभी अपराधी माने जाएंगे। इस फैसले ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।

बिलासपुर हाई कोर्ट की इमारत, जहां सूरजपुर गैंगरेप केस में सजा बरकरार रखी गई।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 19 दिसंबर 2021 का है, जब सूरजपुर में एक युवती के साथ पांच युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि मासूक रजा उसे बहला-फुसलाकर एक सुनसान जगह ले गया, जहां चार अन्य आरोपित—अब्बू बकर उर्फ मोंटी, अशरफ अली उर्फ छोटू, मोहित कुमार और विनीत कुमार—पहले से मौजूद थे।

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इन सभी ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी दी। जनवरी और फरवरी 2022 में भी अलग-अलग जगहों पर ऐसी घटनाएं हुईं। डर और धमकी की वजह से पीड़िता चुप रही, लेकिन गर्भवती होने पर उसने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है।

कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रजनी दुबे की खंडपीठ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने पीड़िता की सुसंगत गवाही, गर्भावस्था और बच्चे के जन्म को अपराध की पुष्टि करने वाला सबूत माना। कोर्ट ने कहा कि वीडियो न मिलना या डीएनए रिपोर्ट का मिलान न होना दोषियों को बरी करने के लिए काफी नहीं है।

हालांकि, पाक्सो, एससी/एसटी और आइटी एक्ट के तहत दोषमुक्ति दी गई, क्योंकि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम साबित नहीं हुई, जाति प्रमाण पत्र बाद में बना और कोई आपत्तिजनक वीडियो बरामद नहीं हुआ। लेकिन आइपीसी की धारा 363, 366, 506, 376 और 376 डी के तहत सजा बरकरार रखी गई।

ट्रायल कोर्ट का फैसला और हाई कोर्ट की टिप्पणी
20 दिसंबर 2023 को सूरजपुर के विशेष न्यायाधीश ने सभी आरोपितों को 4 से 20 साल तक की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने इस फैसले में आंशिक बदलाव करते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और मेडिकल साक्ष्य अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं।

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कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आरोपितों ने डर और ब्लैकमेलिंग के जरिए अपराध को अंजाम दिया। 

आप भी उठाएं आवाज
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक कदम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि अपराध के खिलाफ चुप्पी तोड़ना जरूरी है।

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