भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : सरकार ने गरीबों को छत देने का सपना दिखाया था... लेकिन कुछ लोगों ने इस भरोसे को ही तोड़ दिया।
बिलासपुर से सामने आई एक रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), जो गरीबों को पक्का घर देने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, उसमें गड़बड़ी की परतें खुलने लगी हैं।
2016 से 2023 तक जिले में कुल 59,523 मकानों की मंजूरी दी गई थी। लेकिन इनमें से करीब 3600 मकान आज भी अधूरे पड़े हैं।
📌 सच्चाई जानने जब ज़मीनी हकीकत की जांच हुई, तो तस्वीर बेहद चौंकाने वाली थी।
जिला पंचायत की टीम ने डोर-टू-डोर सर्वे किया। तब पता चला कि कई लाभार्थियों ने मकान की जगह बाइक खरीद ली या फिर शादी-ब्याह में पैसा खर्च कर दिया।
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कुछ लोगों ने घर बनाना शुरू तो किया, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ज्यादा जमीन पर निर्माण कर दिया। नतीजतन बजट बिगड़ गया और मकान अधूरा रह गया।
👉 कहीं लोग गायब, कहीं कानूनी झमेले
जांच में सामने आया कि कुछ लाभार्थी पैसा लेकर दूसरे राज्यों में पलायन कर गए। वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो घर बनाना तो चाहते हैं, लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से काम अटका पड़ा है। कहीं नामिनी तय नहीं हुआ, तो कहीं लाभार्थी की मौत हो चुकी है।
📢 अब प्रशासन ने कसी कमर, दी सख्त चेतावनी
अब जनपद और जिला पंचायत की टीम ऐसे सभी लाभार्थियों से सीधा संपर्क कर रही है।
जो मकान पूरा करना चाहते हैं, उन्हें तकनीकी मदद दी जा रही है।



