छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला: अब निकाह पढ़ाने के लिए मौलाना सिर्फ 1100 रुपए ही ले सकेंगे..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़छत्तीसगढ़ में अब मौलानाओं की मनमानी नहीं चलेगी।

राज्य वक्फ बोर्ड ने बड़ा फैसला लेते हुए मुस्लिम निकाह कराने वाले मौलवियों और इमामों के लिए नजराने की सीमा तय कर दी है। अब कोई भी मौलाना 1100 रुपए से अधिक नहीं ले सकेगा।

निकाह में नजराने की सीमा तय करती वक्फ बोर्ड की बैठक | छत्तीसगढ़ मुस्लिम निकाह नियम

🔸 नियम तोड़ा तो होगी सीधी कार्रवाई

इस संबंध में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने सभी मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को स्पष्ट आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई इमाम या मौलाना इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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🔸 शिकायतों के बाद उठा कदम

डॉ. राज ने बताया कि हाल ही में ऐसी कई शिकायतें मिली थीं, जहां निकाह पढ़ाने के लिए मौलाना ने 5100 रुपए नजराना मांगा। पैसे न देने पर निकाह ही पढ़ाने से इनकार कर दिया गया और मौलाना मौके से चला गया। इस घटना से स्थानीय लोग बेहद नाराज़ हैं।

🔸 शरीयत भी सिखाता है सादगी
वक्फ बोर्ड का कहना है कि शरीयत में भी निकाह को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। इस आदेश के तहत अब राज्य के 800 से अधिक मौलवियों पर यह नियम लागू होगा।

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🔸 इस्लाम में निकाह का क्या है मतलब?
शरीयत के अनुसार, निकाह एक आपसी समझौता होता है, जिसमें लड़की और लड़के दोनों की रज़ामंदी जरूरी होती है। लड़की की सामाजिक सुरक्षा के लिए 'मेहर' का प्रावधान भी होता है। इस्लाम में चार शादियों की भी इजाजत है, जो 7वीं सदी के समय की सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दी गई थी।

🔸 लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया
इलाके के लोगों ने वक्फ बोर्ड के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे निकाह को लेकर हो रही मनमानी पर लगाम लगेगी।

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