भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : जाम से बचने के लिए एंबुलेंस में बैठे श्रद्धालु, पुलिस ने खोली पोल
केदारनाथ धाम की यात्रा इस बार कई हैरान करने वाली घटनाओं को सामने ला रही है। रोज़ाना हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, जिससे ऋषिकेश से लेकर सोनप्रयाग तक जबरदस्त ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
📍 यात्रियों ने अपनाया शातिर तरीका
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रैफिक से बचने के लिए कुछ श्रद्धालुओं ने ऐसा तरीका अपनाया जिसे जानकर हर कोई हैरान है। 14 जून को कुछ यात्रियों ने हरिद्वार से दो एंबुलेंस बुक की, जिनमें कोई मरीज नहीं बल्कि दर्शन के इच्छुक यात्री सवार थे। उनका मकसद था कि एंबुलेंस को लोग आसानी से रास्ता देंगे और उन्हें जाम से नहीं जूझना पड़ेगा।
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हरिद्वार से रवाना हुई एंबुलेंस जब ऋषिकेश, देवप्रयाग, रूद्रप्रयाग, तिलवाड़ा और गुप्तकाशी से होते हुए आगे बढ़ी तो किसी भी पुलिस नाके पर उसे नहीं रोका गया। क्योंकि एंबुलेंस को इमरजेंसी सेवा मानते हुए पुलिस उसे आमतौर पर नहीं रोकती।
🚔 लेकिन सोनप्रयाग पुलिस ने पकड़ी चालाकी
सोनप्रयाग में एक सतर्क पुलिसकर्मी को तब शक हुआ जब गौरीकुंड या केदारनाथ से किसी भी घायल या बीमार यात्री की कोई सूचना नहीं मिली। दरअसल, नियम के मुताबिक अगर किसी यात्री की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जानकारी तत्काल प्रशासन से सोनप्रयाग पुलिस को दी जाती है।
🔍 जांच में सामने आया सच
पुलिस ने एंबुलेंस को रोका और जब गेट खोलकर जांच की गई तो एंबुलेंस के अंदर कोई भी मरीज नहीं मिला, बल्कि एसी एंबुलेंस में आराम से बैठे श्रद्धालु मिले। दोनों एंबुलेंस राजस्थान नंबर की थीं, जिन्हें तुरंत सीज कर दिया गया और चालकों का चालान भी किया गया।
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घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी गई। लोगों का कहना है कि इस तरह इमरजेंसी सेवाओं का दुरुपयोग न सिर्फ गलत है बल्कि असली मरीजों के लिए खतरा भी बन सकता है। उन्होंने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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