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Breaking News: NEET पेपर ली-क मामले के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा..फिर 575 शब्दों की चिट्ठी में लिखी बड़ी बात..

नई दिल्ली। NEET पेपर ली-क मामले को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी हलचल के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

उनके इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में मौजूद लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी।NEET पेपर ली-क मामले में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर धरना दे रही थी। इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा, "वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।"

NEET पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जंतर-मंतर में अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया से जुड़ी खबर।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के साथ दो पन्नों की 575 शब्दों की एक चिट्ठी भी साझा की। इस पत्र में उन्होंने कई मुद्दों का जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने दो अलग-अलग जगह युवाओं को भ्रमित किए जाने की बात भी लिखी।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के बयान के करीब चार घंटे बाद सामने आया। शनिवार सुबह दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा था, "हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।"

उन्होंने यह भी कहा कि आज की नई पीढ़ी कई सवाल पूछती है। ऐसे में उन्हें आदेश देने के बजाय संवाद के माध्यम से हर बात का तर्क समझाया जाना चाहिए, ताकि सही दिशा दिखाई जा सके।

इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों की 575 शब्दों वाली एक चिट्ठी साझा की। इस पत्र में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने दो अलग-अलग जगह यह भी लिखा कि युवाओं को भ्रमित किया गया। चिट्ठी के इसी हिस्से पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

इससे एक दिन पहले शुक्रवार रात NEET पेपर ली-क मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। साथ ही उनके खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात भी कही गई थी। इससे पहले गुरुवार को सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों में भी बदलाव किया था।

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में भाजपा के पुराने रुख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले कहती थी कि उसकी सरकार में इस्तीफे नहीं होते।

इस संदर्भ में जून 2015 का उदाहरण भी सामने आता है, जब तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार में इस्तीफे नहीं होते। उस समय भगोड़े ललित मोदी की कथित मदद को लेकर तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्तीफे की मांग उठी थी।

इसके अलावा वर्ष 2018 के 'मी टू' आंदोलन के दौरान तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर पर कई महिला पत्रकारों ने पत्रकारिता के समय के गंभीर आरोप लगाए थे। विवाद बढ़ने और सरकार पर दबाव बनने के बाद अक्टूबर 2018 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।


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