भिलाई की पत्रिका न्यूज़: बरसात में इन 5 तरह की सब्जियों को खरीदने से बचें, डॉक्टर और डाइटिशियन ने बताई जरूरी वजह
बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन इस दौरान बैक्टीरिया, फंगस और दूसरे हानिकारक सूक्ष्मजीव तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में अगर सब्जियां खरीदते और इस्तेमाल करते समय सावधानी नहीं बरती जाए, तो पेट से जुड़ी कई परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मानसून में सब्जियां खाना बंद कर दिया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ कुछ तरह की सब्जियों को खरीदते और पकाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
क्या मानसून में सब्जियां खाना बंद कर देना चाहिए?
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कैलाश दीपक हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन ऋचा शर्मा ने बताया कि बारिश के मौसम में सब्जियां खाना बंद करने की जरूरत नहीं है। लेकिन कुछ सब्जियों में इस दौरान बैक्टीरिया, फंगस, कीड़े और परजीवी पनपने का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए उन्हें खरीदने और पकाने में विशेष सावधानी जरूरी है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. दीक्षा कटियार के अनुसार मानसून में पाचन संबंधी परेशानियों के मरीज बढ़ जाते हैं। उनके मुताबिक सिर्फ सब्जियां ही इसकी वजह नहीं होतीं, बल्कि अधिक नमी, गलत तरीके से स्टोर करना और साफ-सफाई में लापरवाही भी संक्रमण का बड़ा कारण बनती है।
बारिश में किन 5 तरह की सब्जियों से बचना चाहिए?
1. हरी पत्तेदार सब्जियां
बरसात में पालक, मेथी, सरसों का साग, धनिया, लेट्यूस और पत्ता गोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों को खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। ऋचा शर्मा के अनुसार इनकी कई परतों में मिट्टी, नमी, छोटे कीड़े और बैक्टीरिया छिप सकते हैं। यदि इन्हें अच्छी तरह साफ न किया जाए या ठीक से पकाया न जाए, तो फूड पॉइजनिंग, डायरिया और पेट के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. दीक्षा कटियार भी बताती हैं कि अधिक नमी के कारण इन सब्जियों में मिट्टी और सूक्ष्मजीव फंस जाते हैं, जिन्हें पूरी तरह साफ करना मुश्किल हो सकता है।
2. कच्ची सलाद वाली सब्जियां
खीरा, गाजर, टमाटर, प्याज और चुकंदर जैसी सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं, लेकिन मानसून में इन्हें कच्चा खाते समय विशेष सावधानी जरूरी है। खासकर बाहर मिलने वाले सलाद से बचना चाहिए।
ऋचा शर्मा के मुताबिक इन सब्जियों को पकाया नहीं जाता, इसलिए अगर इनकी सतह पर बैक्टीरिया मौजूद हों तो वे सीधे शरीर में पहुंच सकते हैं। अगर सलाद खाना हो, तो घर पर ताजा तैयार करें और बहते पानी में अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
3. पहले से कटी हुई सब्जियां
बारिश के मौसम में पहले से कटी हुई सब्जियां खरीदने से बचना चाहिए। डाइटिशियन के अनुसार गर्मी और नमी के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। लंबे समय से कटी हुई सब्जियां जल्दी खराब हो सकती हैं और संक्रमण की वजह बन सकती हैं।
4. गंदगी वाली जगह पर बिक रही सब्जियां
सब्जियां भले ही ताजी दिखाई दें, लेकिन अगर वे अस्वच्छ जगह पर रखी हों या गंदे पानी के संपर्क में आई हों, तो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।
ऋचा शर्मा सलाह देती हैं कि ऐसी जगहों से सब्जियां खरीदने से बचें, जहां साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता या दूषित पानी के संपर्क की आशंका रहती है।
5. मुरझाई, सड़ी-गली या फफूंदी लगी सब्जियां
जल्दबाजी में सब्जियां खरीदना नुकसानदायक साबित हो सकता है। अगर सब्जियां ज्यादा गीली, चिपचिपी, मुरझाई हुई, फफूंदी लगी, कीड़ों से खराब या बदबूदार लगें, तो उन्हें बिल्कुल न खरीदें।
डॉ. दीक्षा कटियार के अनुसार ये संकेत बताते हैं कि सब्जियां खराब होना शुरू हो चुकी हैं और बारिश की नमी बैक्टीरिया व फंगस की वृद्धि को और तेज कर देती है।
मानसून में कौन-सी सब्जियां बेहतर विकल्प हैं?
डॉ. दीक्षा कटियार के अनुसार जिन सब्जियों पर प्राकृतिक छिलका होता है, वे मानसून में अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं। इनमें लौकी, तुरई, कद्दू, पेठा और परवल शामिल हैं। इनका खाने वाला हिस्सा छिलके के अंदर सुरक्षित रहता है, इसलिए संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
इसके अलावा मौसम के अनुसार मिलने वाली ताजी सब्जियों को अच्छी तरह पकाकर खाना बेहतर विकल्प है।
जोखिम वाली सब्जियों को सुरक्षित कैसे बनाएं?
आसान सावधानियां अपनाने की सलाह —
- सभी सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
- पत्तेदार सब्जियों की हर पत्ती को अलग-अलग साफ करें।
- मानसून में सब्जियों को कच्चा खाने की बजाय अच्छी तरह पकाकर खाएं।
- सब्जियां धोने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
- जरूरत पड़ने पर फूड-ग्रेड वेजिटेबल वॉश या हल्के बेकिंग सोडा के घोल से साफ करें और बाद में साफ पानी से अच्छी तरह धो लें।
इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर मानसून में भी सब्जियों का सुरक्षित सेवन किया जा सकता है और पेट के संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय या उपचार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। भिलाई की पत्रिका इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।
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रात के करीब 11:30 बजे थे।
बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। कमरे में सिर्फ एक ट्यूबलाइट..
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