PM मोदी का युवाओं के लिए बड़ा ऐलान, फ्री मिलेगी ऑनलाइन कोचिंग, 1 साल में 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग ! क्या है सप्तधारा?जिससे 5-7 साल में बड़े लक्ष्य हासिल करने का संकल्प..

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि आने वाले 5 से 7 वर्षों में देश वह उपलब्धि हासिल कर सकता है, जो पिछले 5 से 7 दशकों में नहीं हो सकी।

लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सप्तधारा का उल्लेख

प्रधानमंत्री ने युवाओं को लेकर भी कई घोषणाएं कीं। सरकार अगले एक साल में
1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने की योजना पर काम करेगी। इसके अलावा गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं के लिए कई परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की बात कही गई।

‘दिमागी नक्सलियों’ से युवाओं को बचाने की बात

प्रधानमंत्री ने अपने 76 मिनट के संबोधन में जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नाम लिए बिना कहा कि देश को ‘दिमागी नक्सलियों’ से बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

महिला आरक्षण को लेकर भी प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से राजनीति नहीं करने की अपील की।

लाल किले से 13वीं बार तिरंगा फहराया

प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 13वीं बार तिरंगा फहराया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और 21 तोपों की सलामी दी गई।

लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम का गायन भी हुआ।

प्रधानमंत्री का इस बार का 76 मिनट का संबोधन लाल किले से उनका तीसरा सबसे छोटा भाषण रहा। इससे पहले वर्ष 2022 में उन्होंने 74 मिनट और वर्ष 2014 में 65 मिनट तक देश को संबोधित किया था।

क्या है ‘सप्तधारा’?

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश की ताकत और विकास के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों को ‘सप्तधारा’ के रूप में सामने रखा। उनका कहना था कि इन सात शक्तियों का इस्तेमाल कर भारत को नई गति और नए लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को देश के निर्माण से जोड़ने की बात भी कही।

सप्तधारा की सात प्रमुख शक्तियां

1. मैन्युफैक्चरिंग पावर

सप्तधारा की पहली ताकत के तौर पर प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग को रखा। उन्होंने कहा कि भारत को डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करनी होगी और दुनिया के लिए भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर बनना होगा।

उन्होंने लागत, गुणवत्ता और बड़े स्तर पर उत्पादन के मामले में वैश्विक मानकों तक पहुंचने की जरूरत बताई।

2. खेती और खाद्य उत्पादन

दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन को बताया गया। प्रधानमंत्री के मुताबिक ग्लोबल मार्केट खुल रहे हैं और एफटीए के जरिए भारत को नए बड़े बाजारों तक पहुंच मिल रही है।

उन्होंने कहा कि भारत के मसाले और बाजरा जैसे उत्पादों को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना होगा।

3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

तीसरी धारा तकनीक और नवाचार की है। प्रधानमंत्री ने रोबोटिक्स, AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस और डेटा सेंटर के दौर का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि नई तकनीक के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, इसलिए भारत को इनोवेशन का ग्लोबल हब बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

प्रधानमंत्री ने UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत की क्षमता का उदाहरण बताते हुए अगली पीढ़ी की कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ने की जरूरत बताई।

4. गति-शक्ति और कनेक्टिविटी

सप्तधारा की चौथी शक्ति ‘गति-शक्ति’ है। इसका उद्देश्य देश में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री ने हाई-स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, इनलैंड वाटरवे, एयरपोर्ट, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और पोर्ट जैसी सुविधाओं की जरूरत बताई। साथ ही पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर जोर दिया।

5. डिफेंस प्रोडक्शन

पांचवीं शक्ति रक्षा उत्पादन को बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने के साथ वैश्विक सप्लायर बनने का लक्ष्य भी रखना चाहिए।

6. ग्रीन और ब्लू इकॉनमी

छठी धारा ग्रीन और ब्लू इकॉनमी से जुड़ी है। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज में भारत को वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की जरूरत बताई।

ब्लू इकॉनमी के तहत फिशरीज, कोस्टल टूरिज्म और ओशन टेक्नोलॉजी में मौजूद अवसरों का उल्लेख किया गया। उनके अनुसार इससे भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं।

7. भारत की सॉफ्ट पावर

सप्तधारा की सातवीं शक्ति भारत की सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे दुनिया भारत से जुड़ रही है।

उन्होंने योग को दुनिया के लिए ऊर्जा और भारत के लिए विश्वास का एक बड़ा आधार बताया।

परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने इस वर्ष ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की है। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को आज की जरूरत बताते हुए परमाणु ऊर्जा को इसका महत्वपूर्ण साधन बताया।

उन्होंने कहा कि भारत ने 200 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखा है और पांच नए परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद में ‘शांति’ अधिनियम पारित किया गया है और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इन सात क्षेत्रों को देश की आगे की विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनकी ताकत के सहारे भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा।