क्या भिलाई नगर निगम चुनाव में महापौर के लिए नया समीकरण बनकर तैयार है, जहा एक ओर, बगावतकी आशंका के डर से कांग्रेस महापौर चुनाव के लिए फार्मूला तलाश रही है,वही दूसरी ओर भाजपा ने भी कि बीजेपी पार्टी भी चुनाव में उतरेगी...

भिलाई। पहली बार भिलाई नगर निगम के मेयर का चुनाव 6 जनवरी को अप्रत्यक्ष मतदान प्रणाली से होगा। निर्वाचित पार्षद इनमें से किसी एक को शहर की सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुनेंगे। वर्तमान में कांग्रेस के पास बहुमत है।  70 में से 37 पार्षद कांग्रेस के हैं। चार अन्य निर्दलीय भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। भिलाई में कांग्रेस का लगातार तीसरी बार मेयर बनना लगभग तय है।


24 वार्डों में जीतने वाली बीजेपी ने भी मेयर पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और वह वाकओवर नहीं होने दे सकती इसलिए भारतीय जनता पार्टी मैदान में उतरेंगे।

यहां चुनाव जीतने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन ने राजनीतिक दौरे के बहाने अपने भिलाई के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को भिलाई राजनीति से दूर रखा है। उनका मानना ये हो सकता है कि पार्टी के पार्षदों को खाली छोड़ देने से स्थिति बिगड़ने का अंदेशा हो सकता है।

कांग्रेस पार्टी को खरीदी बिक्री का तो दर नही लगता है पर  आंतरिक विद्रोह का भय जरूर है राजनीतिक में अपनी इच्छा तरक्की लाभ के कारण भी आंतरिक विद्रोह का खतरा महसूस होता है। कांग्रेस में एक दर्जन से अधिक मेयर प्रत्याशी हैं। हर कोई प्रत्याशी अपने-अपने तरीके से इस प्रयास में लगा हुआ है। इधर पार्टी के कार्यकर्ता समीकरणों की गांठ बांध रहे हैं। वे भविष्य के राजनीतिक विधानसभा लोकसभा का आकलन कर रहे हैं।  संगठन में समन्वय और संतुलन बनाए रखें ताकि पार्टी को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लाभ मिल सके। कांग्रेस चार समीकरणों पर चर्चा कर रही है। जानकारों का यह भी मानना ​​है कि उम्मीदवार के चयन का फॉर्मूला इसी के इर्द-गिर्द घूमेगा।


भिलाई में महापौर और सभापति को तय करने के लिए चार समीकरण

1. भिलाई नगर विधानसभा से मेयर बने तो वैशाली नगर विधानसभा से सभापति, या विपरीत, रेलवे पटरी के पार से मेयर और भिलाई नगर से सभापति। 

ऐसी स्थिति में-

मेयर के दावेदार - एकांश बंछोर, नीरज पाल, सिजू एंथनी, सुभद्रा सिंह।

सभपति पद के उम्मीदवार - संदीप निरंकारी, केशव चौबे।


2. मेयर सामान्य अनारक्षित वर्ग से बनाया जाता है, तो सभापति अन्य पिछड़ा वर्ग से होगा, या विपरीत, मेयर ओबीसी से है तो सभापति गैर-आरक्षित।

ऐसी स्थिति में

  मेयर के दावेदार- सुभद्रा सिंह, संदीप निरंकारी, सिजू एंथोनी।

  सभापति के लिए उम्मीदवार - नीरज पाल, लक्ष्मीपति राजू।


3. रिसाली नगर निगम में साहू, देवांगन, सिन्हा जाति से मेयर प्रत्याशी तय होने पर भिलाई नगर निगम में अन्य जातियों को मौका दिया जा सकता है.

ऐसी स्थिति में

मेयर के दावेदार - एकांश बंछोर, नीरज पाल, सिजू एंथनी।

सभापति पद के उम्मीदवार - सुभद्रा सिंह, लक्ष्मीपति राजू, संदीप निरंकारी, केशव चौबे।


4. नए चेहरे को बनाया जाता है मेयर तब वरिष्ठ पार्षद को सभापति, इसके विपरीत यदि महापौर वरिष्ठ है तो नए पार्षद को सभापति बनाया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में

मेयर के दावेदार - एकांश बंछोर, संदीप निरंकारी।


सभापति के दावेदार- नीरज पाल, सीजू एंथोनी, सुभद्रा सिंह, लक्ष्मीपति राजू।


महिला सभापति बनाकर हैरान कर सकती है छ.ग कांग्रेस

  हालांकि मेयर और चेयरमैन के चुनाव को लेकर तरह-तरह की बातें होती रही हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिस तरह से देख गया है एक महिला पार्षद मेयर के लिए चुनाव से पहले दौड़ रही थी, अगर उसके खिलाफ पार्टी ने कार्य किया तो बगावत हो सकती है। ऐसे में पार्टी महिला सभापति के विकल्प पर भी विचार कर सकती है।


माना जा रहा है कि मेयर देवेंद्र के पसंद के ही बनेंगे

 यह भी अफवाह है कि भिलाई के मेयर बनाने में  देवेंद्र यादव को तरजीह दी जाएगी। चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का श्रेय देवेंद्र को जाता है,37 में से करीब 30 पार्षद उनके करीबी हैं।  न सिर्फ उन्हें टिकट दिलाया, बल्कि उनको जितने के लिए काफी मेहनत भी की, ऐसे में पार्टी उनकी उपेक्षा नहीं कर सकती।