भिलाई की पत्रिका न्यूज़:जगदलपुर (छ.ग)सुकमा जिले में रहने वाली एक नाबालिग ने पारिवारिक कारणों की वजह से अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की. समय रहते परिजन उसे जिला अस्पताल सुकमा ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए मेकाज रेफर कर दिया। यहां डॉक्टरों ने काफी मशक्कत के बाद नाबालिग की जान बचा ली|
मेकाज अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने बताया कि 15
नवंबर की शाम करीब 5 बजे सुकमा इलाके में रहने वाली 12 साल की लड़की ने अपने घर
में फांसी लगा ली थी. उसे लटकता देख परिवार के सदस्यों ने रस्सी काटकर उसे फंदे से
बाहर निकाला और सुकमा के जिला अस्पताल ले गए, जहां से नाबालिग
की हालत खराब होने के कारण उसे सुकमा के डिमरपाल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया
गया।
जहां देर रात नाबालिग को शिशु रोग विभाग में
भर्ती कराया गया। नाबालिग की हालत बेहद गंभीर थी, हाइपोक्सिक एंकिलोपैथी के कारण नाबालिग बेहोश थी। नाबालिग को गंभीरता
से इलाज दिया गया, सभी
डॉक्टरों एवं स्टाफ के लगातार इलाज से लड़की ठीक हो गई।
ठीक होने पर बालिका को सकारात्मक समझाईश भी दी गई, जिससे वह भविष्य में कभी यह गलती दुबारा न करे। बालिका की जान बचाने में डॉ. डी आर मंडावी, डॉ. हर्ष, डॉ. बबिता, डॉ. तुषार, डॉ. इशिता, डॉ. स्कॉट के साथ ही वार्ड की स्टाफ नर्स से लेकर कर्मचारियों का काफी सहयोग रहा।इस घटना से यह साबित होता है की आज कल के बच्चो की मानसिक स्थिति क्या है बच्ची किस मानसिक ताना से गुजर रही थी जिसके कारण उसने ऐसा कदम उठाने की कोशिश की|

