रेप के झूठे मामले में युवती ने लड़के को फंसाया फिर कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला , जिसे सुनकर हर कोई रह गया दंग....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : बरेली में जब ऐसा मामला सामने आया जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया. बलात्कार के एक मामले में झूठे आरोप में लड़के को बिना स्पष्टीकरण या गलती के चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी वो भी उस अपराध के लिए जो उसने किया ही नहीं|


कतिथ रूप से रेप का आरोप लगाने वाली लड़की ने मुकदमे में अपना बयान से नहीं मुकरती तो सच का कभी पता नहीं चल पाता। वर्तमान में, अदालतें झूठी शिकायतें दर्ज करने वाली लड़कियों पर नकेल कस रही हैं।

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11 सितंबर 2018 को बारादरी थाने में एक लड़के पर अपहरण कर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज हुआ था. पुलिस ने लड़के को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पूरी घटना में लड़की ने लड़के पर नशीला प्रसाद पिलाने, दिल्ली ले जाकर कमरे में बंद करने और रेप करने का आरोप लगाया था. ऐसा कहा जाता है कि मामले में अदालत में गवाही के दौरान लड़की अपने गवाही से मुकर गयी  जिसके बाद अदालत ने लड़के को बरी कर दिया।

जब कोर्ट में सच्चाई सामने आई तो कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और लड़के को बरी कर दिया.फैसला जारी हो जाने के बाद अदालत ने घोषणा की कि लड़के ने जेल में कितने दिन बिताए हैं। इस लड़की को भी इतने ही दिन (4 साल )जेल में बिताने चाहिए. साथ ही कोर्ट ने इस लड़की पर जुर्माना भी लगाया|

 अदालत ने कहा, अगर लड़के को जेल नहीं भेजा गया होता यदि वह उस दौरान मजदूर के रूप में भी कार्य करता तो भी 5 लाख 88,000 रुपये से अधिक कमाता। इसलिए लड़की से यह रकम वापस लेकर लड़के को दी जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो लड़की को छह महीने और जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी।

पूरी कहानी में इस लड़की पर झूठे बयान देने का आरोप लगाया गया। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने उसे दोषी पाया और सजा सुनाई। कोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, 'इन महिलाओं की हरकतों से होने वाले नुकसान को वास्तविक पीड़ितों को भुगतना पड़ता है।

इस मामले में कोर्ट ने कहा कि यह समाज के लिए बेहद गंभीर स्थिति है. अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के साधन के रूप में पुलिस या अदालतों का उपयोग करने बेहद अनुचित है|अदालत ने यह भी कहा कि महिलाओं को अनुचित लाभ हासिल करने के लिए पुरुषों के हितों पर हमला करने की अनुमति नहीं है। 

बता दे  यह 2019 का मामला था जब लड़की की मां ने रेप की शिकायत दर्ज कराई थी जिसके कारण अजय उर्फ ​​राघव को जेल जाना पड़ा था. जेल जाने और अदालत में मुकदमा जारी रहने के बाद, पीड़िता ने अपनी गवाही से पलट गयी  और कहा कि उसका अपहरण या बलात्कार नहीं किया गया था। 

फिर कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए लड़की को झूठी गवाही देने के जुर्म में जेल भेज दिया और आरोपी राघव को रिहा कर दिया गया. कोर्ट ने लड़की को साढ़े चार साल जेल की सजा सुनाई और 5 लाख रुपये और 88,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया|

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