अयोध्या-फैजाबाद में आखिर क्यों हार गई BJP, जानिए भाजपा के लल्लू सिंह के हार के वो 5 बड़े कारण..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : अयोध्या लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लल्लू सिंह को हार का सामना करना पड़ा। यह स्थिति 1993 के यूपी विधानसभा चुनाव परिणाम की याद दिलाती दिखाई। रामलला लहर में भाजपा बड़ी जीत की उम्मीद में थी, लेकिन भाजपा को बड़ा झटका लगा है।

अयोध्या में विकास नहीं आया काम-
अयोध्या में विकास करना बीजेपी के लिए कोई काम नहीं आया। लोकसभा चुनाव 2019 के बाद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया। इसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में मंदिर की आधारशिला स्थापित करने अयोध्या आए। कोविड 19 के खतरे के बीच अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा देश भर में गरमाया।

22 जनवरी को इस साल अयोध्या मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ। इस कार्यक्रम समारोह में भाग लेने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचे थे। उनके साथ-साथ देश भर से प्रभावशाली लोगों का अयोध्या में आगमन हुआ। हालांकि, विपक्ष का कोई भी नेता इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने नहीं आया। इस बात पर खूब राजनीति हुई थी। इसके बाद भी फैजाबाद सीट पर कोई असर नहीं पड़ा।

क्या रहे बीजेपी के हार के कारण

बीजेपी की हार के कारणों की चर्चा शुरू हो गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा इस सीट पर जीत को लेकर कॉन्फिडेंट दिख रही थी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और पीएम मोदी को अयोध्या में मिले रेस्पांस के आधार पर भाजपा की जीत तय मानी जा रही थी। हालांकि, पार्टी को सफलता नहीं मिल पाई। ये हैं मुख्य कारण...

१) पहला कारण : यह है कि इलाके में बीजेपी के लल्लू सिंह के खिलाफ विरोध की लहर चल पड़ी है. लोकसभा क्षेत्र में उनकी मौजूदगी को लेकर जनता में नाराजगी थी. भाजपा उम्मीदवार के प्रति लोगों के असंतोष ने उन्हें चुनाव में ले डूबी।

२)दूसरा कारण: बीजेपी उम्मीदवार लगातार 10 साल से सांसद थे। उनको बदले जाने का दबाव भाजपा पर लोकसभा क्षेत्र के नेताओं की ओर से भी बनाया जा रहा था। इसके बावजूद भी बीजेपी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

३)तीसरा कारण: भारतीय जनता पार्टी यहां पर अति आत्म विश्वास का शिकार हो गई। भाजपा ने माना कि उम्मीदवार के चेहरे की जगह अयोध्या में प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा चलेगा। यह सफल नहीं हो पाया।

४)चौथा कारण: लल्लू सिंह पर क्षेत्र में जमीन खरीद और फिर उसे ऊंचे दामों में बेचने का आरोप लगा। दरअसल, राम मंदिर पर फैसले के बाद जमीन खरीद-बिक्री का मामला जोर-शोर से उठा था। इस पर बड़ा जोर दिया गया।

५)पांचवां कारण: जातीय समीकरण को साधने में भाजपा सफल नहीं हो पाई। पन्ना प्रमुखों का काम पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया। अखिलेश यादव इस सीट पर पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए को एकजुट करने में सफल हो गए। यह भाजपा की हार का कारण बन गई।

करोड़ों की विकास योजनाएं नहीं आई काम

अयोध्या में रामलला मंदिर के निर्माण से करोड़ों रूपये की विकास परियोजनाएं पूरी हुईं। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने 15,700 करोड़ रुपये के योजनाओं का शिलान्यास - शुभारंभ किया. अयोध्या के एक प्रमुख रेलवे स्टेशन का भव्य नवीनीकरण किया गया है। 

इसके अलावा, एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी विकास किया जा रहा है। अयोध्या में रामलला मंदिर के अलावा सड़कों और रास्तों के साथ गलियों की भी मरम्मत की गई.। लेकिन, यह सब अयोध्यावासियों को रास नहीं आया। अयोध्या में 2017 के बाद से हर साल दिवाली पर दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रकार के आयोजनों का भी प्रभाव नहीं दिखा।