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डॉक्टर मनोज, जो तिपवई सीएचसी में कार्यरत थे, ने संगीता नामक एएनएम की सलाह पर तंत्र-मंत्र के जरिए बेटे की कमी पूरी करने का प्रयास किया। जब मनोज की बीवी ने तीसरी बेटी को जन्म दिया, तो उसे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। संगीता ने उसे विश्वास दिलाया कि तंत्र-मंत्र के जरिए उसकी बेटी को मारने पर बेटा बनकर वापस आएगी।
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डॉक्टर ने अपने सरकारी घर में ही पंद्रह दिन की मासूम बेटी की हत्या कर दी और उसे एक तांत्रिक के हवाले कर दिया। इसके बाद मनोज ने संगीता से लड़के की मांग की, लेकिन जब उसे 6-7 महीने का बच्चा दिया गया तो उसने इसे लेने से मना कर दिया। विवाद बढ़ने पर मामला पुलिस तक पहुंचा और पूरी घटना का पर्दाफाश हो गया।
पुलिस ने इस मामले में डॉक्टर मनोज, उसकी पत्नी और तीन अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। इस घटना ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुप्रथाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आजमगढ़ की यह घटना यह दिखाती है कि समाज में अंधविश्वास कितना गहरा हो सकता है, खासकर जब यह शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के बावजूद हावी हो जाता है। यह घटना समाज के उन हिस्सों को उजागर करती है जहां तंत्र-मंत्र और जादू-टोना पर विश्वास आज भी मौजूद है और जानलेवा साबित हो सकता है।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने इस घिनौने कृत्य की कड़ी निंदा की है। समाज के विभिन्न वर्गों ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त सजा होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई इस तरह के अंधविश्वास में न फंसे।
घटना के खुलासे के बाद, पुलिस और प्रशासन ने भी इस पर गंभीरता से ध्यान दिया है। आरोपी डॉक्टर और अन्य शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने समाज में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा और जागरूकता ही अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार हैं। स्कूलों और कॉलेजों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। समाज के सभी वर्गों को मिलकर अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देना चाहिए।
आजमगढ़ की इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हमें मिलकर इसे समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना होगा ताकि भविष्य में कोई मासूम इस तरह के घिनौने कृत्य का शिकार न हो|
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