भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई के स्पर्श मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल को अब क्लिनिकल ट्रायल सेंटर का दर्जा मिला है, जिससे यह मध्यभारत का पहला ऐसा सेंटर बन गया है जहां नई दवाइयों की प्रभावशीलता को परखा जाएगा। यह सेंटर अमेरिका की एफडीए द्वारा प्रमाणित है, और यहां सामान्य से लेकर लाइलाज बीमारियों तक के लिए नई दवाइयों पर रिसर्च होगी।
डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार, स्पर्श हॉस्पिटल को क्लिनिकल ट्रायल सेंटर बनाने के लिए कठोर मापदंडों पर परखा गया था। शुरुआती ट्रायल एंड्रोजेनिक एलोपेशिया (गंजेपन) पर फोकस करेगा। कई बार लोग विभिन्न प्रकार के एलोपेथी इलाज करके थक जाते हैं, लेकिन बाल झड़ने की समस्या नहीं सुलझती।
अब ऐसे मरीजों पर नई दवाइयों का प्रयोग किया जाएगा। इसके बाद सिकलिंग, डायलिसिस, कैंसर, और मल्टीऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर बीमारियों पर भी ट्रायल होंगे।स्पर्श हॉस्पिटल के एमडी डॉ. दीपक वर्मा ने बताया कि भारत में क्लिनिकल ट्रायल के मामले में देश काफी पीछे है।
अमेरिका में पिछले साल 44 हजार दवाइयों का ट्रायल हुआ जबकि भारत में केवल 77 दवाइयों का। स्पर्श में क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया जिला और राज्य स्तर पर ड्रग कंट्रोल बॉडी को जानकारी देने के बाद ही शुरू होगी। मरीजों की सुरक्षा प्रोफाइल को ध्यान में रखते हुए रिसर्च की जाएगी।
क्लिनिकल ट्रायल टीम के प्रमुख डॉ. संजय गोयल ने बताया कि यह ट्रायल ऐसे मरीजों के लिए मुफ्त इलाज का विकल्प है जो पारंपरिक इलाज से ठीक नहीं हो रहे हैं। शुरू में यह ट्रायल सिर्फ गंजेपन के मरीजों पर ही होगा। ट्रायल में भाग लेने वाले मरीजों को सभी सुविधाएं मुफ्त मिलेंगी और उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस प्रकार, स्पर्श मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में नई दवाइयों की परीक्षण प्रक्रिया न केवल भिलाई बल्कि पूरे मध्यभारत में चिकित्सा अनुसंधान और उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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