बेहद दर्दनाक : MBA पति ने बेरोजगारी से परेशान होकर कर ली खुदखुशी , पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी ने भी दे दी जान , दो साल पहले की थी लव मैरिज...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :गोरखपुर/बनारस, उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी की वजह से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। हरीश, जो एमबीए डिग्रीधारी थे, ने बनारस के सारनाथ में आत्महत्या कर ली। जब उनकी पत्नी संचिता को इस बात की सूचना मिली, तो उन्होंने भी गोरखपुर में अपने पिता के घर पर खुदकुशी कर ली। 


हरीश की कहानी बेरोजगारी की समस्या की गहराई को उजागर करती है। हरीश ने कुछ समय मुंबई में एक बैंक में काम किया, लेकिन पत्नी की तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें गोरखपुर लौटना पड़ा। इसके बाद, नौकरी छूट गई और हरीश पिछले दो वर्षों से बेरोजगार था। 

करीब एक साल से हरीश गोरखपुर में अपनी ससुराल में रह रहा था। पिछले शुक्रवार को वह बिहार स्थित अपने घर के लिए निकले थे, लेकिन घर न जाकर बनारस के सारनाथ पहुंच गए। वहां उन्होंने एक होम स्टे बुक कराया और उसी रात फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। 

हरीश और संचिता ने दो साल पहले प्रेम विवाह किया था। संचिता के पिता, डॉ. रामशरण श्रीवास्तव, गोरखपुर के जाने-माने मनोचिकित्सक हैं। उन्होंने बताया कि बेरोजगारी की वजह से हरीश अवसाद में थे और यही कारण उनकी आत्महत्या का प्रमुख कारण बन गया। 

हरीश की आत्महत्या की खबर सुनकर संचिता के लिए यह सदमा असहनीय था। उन्होंने भी गोरखपुर में अपने पिता के घर पर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने दोनों परिवारों को गहरे शोक में डाल दिया है। 

घटना का विवरण:

हरीश ने सारनाथ के अटल नगर कॉलोनी मवैया में आत्महत्या की। उन्होंने एक होम स्टे बुक कराया था और शुक्रवार की रात 8 बजे चेक-इन किया था। होम स्टे के दौरान उन्होंने ऑनलाइन खाना मंगाया, जिसका मैसेज उनकी पत्नी के मोबाइल पर गया। संचिता ने जब देखा कि हरीश बनारस में हैं, तो वह चिंतित हो गईं और लगातार फोन मिलाने लगीं, लेकिन हरीश ने फोन नहीं उठाया।

परिवार के लोग भी परेशान हो गए और बनारस में रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क किया। जब रिश्तेदार हरीश के बुक किए गए कमरे पर पहुंचे, तो देखा कि उन्होंने फांसी लगा ली है।

**पुलिस की कार्यवाही:**

थाना क्षेत्र के पुलिस चौकी इंचार्ज सुधांशु सिंह ने कहा कि यह मामला आत्महत्या का है और जो तथ्य मिले हैं, उनके आधार पर जांच की जा रही है। 

इस घटना ने समाज में बेरोजगारी और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर किया है। बेरोजगारी न केवल आर्थिक संकट लाती है, बल्कि मानसिक तनाव और अवसाद को भी जन्म देती है। यह आवश्यक है कि हम अपने समाज में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और एक दूसरे का समर्थन करें।

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