भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छग मुंगेली की एक दुखद घटना ने एक बार फिर घरेलू हिंसा के भयावह रूप को उजागर कर दिया है। यह घटना एक नवविवाहिता मनीषा साहू की है, जो शादी के सिर्फ तीन महीने बाद ही अपने शराबी पति की क्रूरता का शिकार हो गई। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज में मौजूद उस गंभीर समस्या की है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
घटना का प्रारंभ: उम्मीदों का अंत
मनीषा साहू की शादी तीन महीने पहले ब्रम्हा साहू से सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। उसकी मां, शकुंतला साहू, ने बड़े अरमानों और उम्मीदों के साथ अपनी बेटी को विदा किया था। एक बेटी के माता-पिता के लिए उससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है कि उनकी बेटी एक नए जीवन की शुरुआत कर रही है? लेकिन, किस्मत ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया।
शराब और क्रूरता
शादी के बाद से ही ब्रम्हा साहू का बर्ताव बदल गया था। शराब का सेवन उसकी आदत में शुमार हो गया, और इसी के साथ शुरू हो गया मनीषा पर अत्याचार। मनीषा ने अपनी मां को कई बार अपने पति के बर्ताव के बारे में बताया था। 20 अगस्त की शाम को मनीषा ने फोन पर बताया कि ब्रम्हा साहू ने गाली-गलौज और मारपीट करते हुए उसे जान से मारने की धमकी भी दी है। मनीषा की मां तुरंत उसकी मदद के लिए गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
मौत की रात
जब मनीषा की मां उसकी मदद के लिए पहुंची, तो मनीषा को पहले ही जिला अस्पताल ले जाया जा चुका था। गंभीर स्थिति के कारण उसे बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में रिफर कर दिया गया। मनीषा की हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः 23-24 अगस्त की मध्यरात्रि में उसकी मृत्यु हो गई।
कानूनी कार्रवाई
शकुंतला साहू की रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 296, 351 (2), 115 (2) के तहत मामला दर्ज किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। आरोपी ब्रम्हा साहू को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त दुपट्टा और बेल्ट भी जब्त कर लिया गया।
न्याय की आस
ब्रम्हा साहू ने पुलिस को दिए गए बयान में कबूल किया कि उसने 20 अगस्त को मनीषा से मारपीट की और फिर दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया। इस क्रूरता का परिणाम मनीषा की असामयिक मृत्यु के रूप में सामने आया। अब ब्रम्हा साहू न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है, लेकिन मनीषा के माता-पिता के लिए यह न्याय पर्याप्त नहीं हो सकता।
समाज के लिए संदेश
यह घटना केवल एक व्यक्ति या परिवार की नहीं है, यह हमारे समाज में व्याप्त उन समस्याओं का प्रतीक है जो आज भी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। इस घटना से समाज को यह समझने की जरूरत है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाजिक समस्या भी है। हमें एक ऐसा समाज बनाने की जरूरत है जहां महिलाएं सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर सकें।
मनीषा की मौत उन हजारों महिलाओं की आवाज है जो आज भी घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं और उन लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास करें जो इस सामाजिक बुराई के शिकार हुए हैं।
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