भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छग , बिलासपुर के सबसे बड़े सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहां इलाज के इंतजार में एक हार्ट पेशेंट की जान चली गई। मोहम्मद शमशाद हुसैन नाम के व्यक्ति को सीने में तेज दर्द के बाद अस्पताल लाया गया था, लेकिन इलाज की जगह उन्हें पर्ची लेने के लिए लाइन में खड़ा कर दिया गया। इस बीच, हार्ट अटैक के चलते उनकी मौत हो गई।
इलाज के बजाय कागजी औपचारिकताओं में फंसा जीवन
इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस पार्टी ने इसे अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही बताते हुए दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर मरीज की हालत को गंभीरता से लिया जाता और उसे प्राथमिक चिकित्सा मिलती, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन का बचाव
दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि शमशाद हुसैन को अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों द्वारा ट्राइएज में देखा गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ने पर तुरंत ईसीजी किया गया और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) भी दिया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सवालों के घेरे में अस्पताल की प्रक्रिया
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में पहले पर्ची बनवाने जैसी औपचारिकताओं में मरीजों को नहीं उलझाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को गंभीर मरीजों के लिए एक विशेष प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए, ताकि इलाज में किसी तरह की देरी न हो।
यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि ऐसी स्थिति में अस्पताल की प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए—जान बचाना या कागजी कार्रवाई?
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