हुए।
ठगी की शुरुआत:
नोखेलाल सिन्हा, जो कि किसानी के साथ-साथ CGPSC की भी तैयारी कर रहे थे, ने बताया कि उनकी मुलाकात साल 2014-15 में रेखराज खेलवार और उसकी पत्नी भारती खेलवार से हुई थी। दोनों का मोहंदी गांव में आना-जाना शुरू हो गया, और धीरे-धीरे रेखराज और भारती ने CGPSC में उच्चस्तरीय संपर्कों का दावा कर नोखेलाल को सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बदले उन्होंने 35 लाख रुपए की मांग की, लेकिन समझौते में 29.50 लाख रुपए लिए गए।
ठगी की कार्यवाही:
पैसे किस्तों में दिए गए, लेकिन नायब तहसीलदार के पद पर चयन नहीं हुआ। जब नोखेलाल ने पैसे वापस मांगे, तो ठगों ने देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने दुर्ग कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस जांच:
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ठग दंपति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि ठगों ने खुद को प्रभावशाली बताकर और सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा वादा कर लोगों से ठगी की। इस मामले में अभी जांच जारी है, और आरोपियों की पहचान पुख्ता कर ली गई है।
अन्य ठगी के मामले:
इसी तरह के ठगी के मामले छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी सामने आए हैं, जहां सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों की ठगी की गई। रायपुर पुलिस ने इस सिलसिले में शिक्षा विभाग से बर्खास्त एक कर्मी और अन्य दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने लालपुर में एक ऑफिस खोलकर ठगी की थी और लोगों से पैसे लेकर उन्हें नौकरी का झांसा दिया था।
यह घटना बताती है कि किस तरह से सरकारी नौकरी के नाम पर भोले-भाले लोगों को ठगा जाता है। पीड़ितों को चाहिए कि वे इस तरह के फर्जी वादों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या संस्था पर भरोसा न करें। पुलिस ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही है, और उम्मीद है कि दोषियों को जल्द ही सजा मिलेगी।




