दुर्ग : लेह-लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में शहीद हुये छत्तीसगढ़ के वीर सपूत लांस हवलदार उमेश कुमार साहू के अंतिम यात्रा पर उमड़ पड़ी लोगो की भीड़ , अस्वस्थ पिता और दो छोटे बच्चो की जिम्मेदारी अब पत्नी के कंधो पर...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दुर्ग , छत्तीसगढ़ के वीर जवान लांस हवलदार उमेश कुमार साहू का बलिदान देश के लिए एक अत्यंत भावुक और गर्व से भरा क्षण है। भारतीय सेना के 19 महार रेजीमेंट के इस जांबाज सैनिक ने 19 अक्टूबर 2024 को लेह-लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अंतिम सांस ली। वह मां भारती की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से तैनात थे, लेकिन कठिन हालातों और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उनकी वीरगति हो गई।

परिवार और गाँव में शोक की लहर

लांस हवलदार उमेश कुमार साहू का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव कोड़िया, दुर्ग पहुंचा, तो पूरा गांव शोक और गर्व से अभिभूत हो गया। उमेश के बलिदान को सम्मानित करने के लिए दुर्ग जिले से कोड़िया तक एक विशाल श्रद्धांजलि रैली निकाली गई। इस रैली में गांव के युवाओं ने बाइक पर सवार होकर देशभक्ति के नारे लगाए और शहीद के पार्थिव शरीर को सेना के वाहन में ले जाया गया। हर तरफ वीर जवान को अंतिम विदाई देने के लिए नम आंखों से लोग खड़े थे।

सेना और प्रशासन का सम्मान

शहीद उमेश के अंतिम संस्कार के समय उन्हें सेना की ओर से पूर्ण सैन्य सम्मान दिया गया। गांव के निवासियों के साथ-साथ जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे। पूरे गांव में मातम छाया हुआ था, लेकिन साथ ही गर्व भी था कि गांव का एक सपूत देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ।

पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ

उमेश साहू का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। वह मध्यमवर्गीय परिवार से थे, और कुछ वर्षों में उन्होंने अपने बड़े भाई और मां को खो दिया था। हाल ही में, जून 2024 में उनके छोटे भाई का भी निधन हुआ था। इस दुःखद घटना के बाद, उन्होंने अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए छुट्टी बढ़ा ली थी। 30 अगस्त 2024 को वह फिर से ड्यूटी पर लौटे और अपने देश की सेवा में जुट गए। उनका परिवार अब उनके अस्वस्थ पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चों पर निर्भर है। उमेश साहू ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया और पूरे परिवार का सहारा बने रहे।

आखिरी बातचीत और शहादत की सूचना

उमेश की पत्नी ने बताया कि वे नियमित रूप से फोन पर बातें करते थे, और शहादत से एक दिन पहले भी उनकी बातचीत हुई थी। उस वक्त वह पूरी तरह स्वस्थ थे और सामान्य लग रहे थे। लेकिन, 19 अक्टूबर की शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। सेना के अधिकारियों ने परिवार को उनकी गंभीर स्थिति के बारे में सूचित किया, और रात 9 बजे उन्हें शहादत की खबर मिली।

शहीद उमेश कुमार साहू का जीवन और कर्तव्य

उमेश कुमार साहू ने 22 सितंबर 2009 को सेना में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग मध्य प्रदेश के सागर में की थी, इसके बाद जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, हिमाचल प्रदेश, ग्वालियर और मेघालय जैसे कठिन इलाकों में भी ड्यूटी की। हाल ही में, वह लेह-लद्दाख के कठिन परिस्थितियों में तैनात थे। उनके परिवार में 6 साल की बेटी और 3 साल का बेटा है, जो अब अपने पिता के अभाव में आगे का जीवन बिताएंगे।

 

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