भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :छत्तीसगढ़ में आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स (SIMS) के एआरटी सेंटर ने हाल ही में एक चिंताजनक खुलासा किया है। एचआईवी (HIV) संक्रमण के इलाज के लिए पंजीकृत 10 मरीजों के शरीर पर टैटू के निशान पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाने के दौरान अगर स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें एचआईवी संक्रमण और अन्य संक्रमण शामिल हैं।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विशेषज्ञ बताते हैं कि टैटू बनवाने के लिए उपयोग की जाने वाली सुइयों को बार-बार उपयोग करने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यदि सुई को संक्रमित व्यक्ति पर इस्तेमाल किया गया हो और उसे बिना साफ किए किसी और पर इस्तेमाल किया जाए, तो एचआईवी और अन्य संक्रामक रोग आसानी से फैल सकते हैं।
सिम्स में एचआईवी के आंकड़े
1. सिम्स के एआरटी सेंटर में 4534 एक्टिव एचआईवी मरीज पंजीकृत हैं।
- पुरुष: 2313
- महिलाएं: 1795
- बच्चे: 222 (लड़के) और 167 (लड़कियां, 15 साल से कम उम्र)
2. गर्भवती महिलाएं:
- 30 गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव हैं।
- सिम्स में इन महिलाओं और उनके बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष इलाज और मॉनिटरिंग की जाती है।
3. टीबी और एचआईवी का संयुक्त खतरा:
- 42 मरीज एचआईवी के साथ टीबी से भी पीड़ित हैं।
- ऐसे मरीजों के इलाज में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है ताकि संक्रमण का चैन तोड़ा जा सके।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों की विशेष देखभाल
एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए:
- एक ही दिन में जांच, पंजीकरण, और उच्च-स्तरीय इलाज की शुरुआत की जाती है।
- दूध पिलाने वाली माताओं को प्राथमिकता देकर इलाज प्रदान किया जाता है।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें
अगर आप टैटू बनवाने का शौक रखते हैं, तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें:
1. प्रमाणित टैटू आर्टिस्ट से ही टैटू बनवाएं।
2. उपयोग होने वाले उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज हों।
3. टैटू बनवाने से पहले और बाद में स्वच्छता का खास ख्याल रखें।
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