मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में सहायक शिक्षक के 2,900 पदों पर बीएड डिग्रीधारियों की नियुक्ति की थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने पहले ही प्राथमिक शिक्षकों के लिए बीएड डिग्री को अवैध बताते हुए इस भर्ती को रद्द करने का आदेश दिया था। बीएड शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त न होने पर डीएलएड अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दायर कर कोर्ट से न्याय की मांग की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी की नौकरी छीनने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके बजाय, कोर्ट ने सुझाव दिया कि बीएड डिग्रीधारियों को मिडिल स्कूल में शिक्षक वर्ग दो के पदों पर समायोजित किया जा सकता है। इस प्रकार, वे प्राइमरी स्कूल के बजाय मिडिल स्कूल में अपनी सेवाएं दे सकेंगे, जो उनकी शिक्षा योग्यता और अनुभव के अनुरूप है।
कोर्ट ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों को एक साल का पढ़ाने का अनुभव मिल चुका है, और उन्हें पूरी तरह से हटाना सही नहीं होगा। दूसरी ओर, डीएलएड अभ्यर्थियों को भी न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस मामले का अंतिम समाधान अब 28 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ही स्पष्ट हो पाएगा।



