भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। नंदिनी थाना क्षेत्र के अहिरवारा के गोढ़ी गांव के गौठान में 13 से अधिक गायों की भूख-प्यास से मौत हो गई। इन गायों के शव सड़कर कंकाल में तब्दील हो गए और कुत्ते उन्हें नोचते नजर आए। यह स्थिति तब सामने आई जब गांव के लोगों ने गौठान से आ रही दुर्गंध की शिकायत की।
कैसे हुआ खुलासा?
सरपंच गोपी साहू ने गांव की फसलें आवारा मवेशियों से बचाने के लिए लगभग 40 गायों को गौठान में बंद कर दिया था। सरपंच ने वादा किया था कि उनके चारा और पानी की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन पिछले 15 दिनों तक मवेशियों को न तो चारा दिया गया और न ही पानी। जब गौठान में सड़ रही लाशों की दुर्गंध आने लगी, तब यह मामला उजागर हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरपंच ने मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने मृत मवेशियों के शव ट्रैक्टर में भरकर दूसरी जगह फेंकने का प्रयास किया। लेकिन इसी दौरान पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और पोस्टमॉर्टम के लिए कुछ शव अपने कब्जे में ले लिए।
क्या कहती है प्रशासनिक कार्रवाई?
धमधा जनपद पंचायत के सीईओ किरण कौशिक ने बताया कि गायों की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। प्राथमिक जांच में निमोनिया से मौत की आशंका जताई गई है, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारण का पता चल पाएगा।
सीईओ ने कहा, "अगर सरपंच ने कमेटी बनाई थी, तो चारा-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी थी। अगर यह नहीं किया गया, तो गायों की मौत के लिए सरपंच और कमेटी पूरी तरह से जिम्मेदार मानी जाएगी।"
गांव में आक्रोश और गो-सेवकों का हंगामा
घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया। गो-सेवकों ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। माधव सेना रायपुर के नरेश चंद्रवंशी ने अपनी टीम के साथ नंदिनी थाने में शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने बताया, "पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।"
सरपंच और गांववालों के आरोप-प्रत्यारोप
गोढ़ी गांव के पंच पति डोमर सिंह पाल ने इस घटना के लिए सीधे सरपंच को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि सरपंच ने एक कमेटी बनाई थी, लेकिन उसने अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया।
वहीं, सरपंच गोपी साहू ने अपनी सफाई में कहा कि पूरे गांव को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों और गांववालों ने फसल बचाने के लिए दबाव डाला था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और गौठानों की स्थिति
छत्तीसगढ़ में गौठानों की देखभाल का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। भूपेश बघेल सरकार ने "नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी" योजना के तहत गौठानों की स्थापना की थी। इन गौठानों में गायों के लिए चारा-पानी के साथ-साथ बर्मी कंपोस्ट खाद, इत्र, पेंट और रंगोली बनाने का काम किया जाता था।
सरकार ने हाल ही में प्रत्येक गौवंश के पीछे खर्च की जाने वाली राशि को 35रूपये तक बढ़ाने की घोषणा की है। लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की कमी अब ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है।
यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देती है, बल्कि मानवता और पशु-कल्याण के प्रति असंवेदनशीलता को भी उजागर करती है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होने की संभावना है। लेकिन इस घटना ने गौठानों और आवारा मवेशियों की देखभाल को लेकर राज्यव्यापी चिंता खड़ी कर दी है।
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