CG : मछुआरों की पकड़ी 65 किलो वजनी और 6 फीट लंबी विशाल गोल्डन फिश बनी चर्चा का विषय , देखने उमड़े लोग...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :छग , कबीरधाम जिले का सरोदा जलाशय एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का केंद्र बनी है 65 किलो वजनी और 6 फीट लंबी विशाल मछली, जिसे मछुआरों ने सोमवार की सुबह अपने जाल में पकड़ा। यह मछली न केवल स्थानीय लोगों के कौतूहल का विषय बन गई, बल्कि मछुआरों के लिए एक बड़ी उपलब्धि भी साबित हुई।

कैसे पकड़ी गई विशाल मछली?

सामान्य दिनों की तरह मछुआरों ने सुबह-सुबह जलाशय में मछली पकड़ने के लिए जाल डाला। लेकिन इस बार जाल अचानक इतना भारी हो गया कि उन्हें लगा, शायद कोई पत्थर या भारी वस्तु फंस गई है। कई प्रयासों के बाद भी जब जाल नहीं खींचा जा सका, तो अन्य मछुआरों को बुलाया गया। तीन मछुआरों की संयुक्त कोशिश से जाल को बाहर निकाला गया। बाहर आते ही सभी मछुआरे हैरान रह गए—जाल में एक विशालकाय मछली फंसी हुई थी।

विशाल मछली का परिचय

विशेषज्ञों के अनुसार, यह ब्लैक कार्प प्रजाति की मछली है। इसका शरीर लंबा और फ्यूसीफॉर्म आकार का होता है। ये मछलियां गहरे भूरे, भूरे, या नीले-काले रंग की होती हैं और इनके पंख गहरे रंग के होते हैं। इस प्रजाति की मछलियां अपनी विशालता और वजन के लिए जानी जाती हैं।

सरोदा जलाशय: मछुआरों की उम्मीदों का केंद्र

सरोदा जलाशय कबीरधाम जिले की मध्यम सिंचाई परियोजना का हिस्सा है और मछली पालन का प्रमुख केंद्र है। यहां की प्रमुख मछुआरा समितियों—नेताजी मछुआरा समिति, श्रीराम मछुआ सहकारी समिति, और केंवट मछुआरा समिति—को जलाशय पट्टे पर दिया गया है। 

जलाशय न केवल मछुआरों की आय का स्रोत है, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभा रहा है। इससे पहले भी इस जलाशय में 80 किलो वजनी मछली पकड़ी जा चुकी है, जो इसे बड़ी मछलियों का ठिकाना साबित करती है।

स्थानीय बाजार की ओर बढ़ी विशाल मछली

मछुआरों ने बताया कि इस विशाल मछली को स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए ले जाया जाएगा। मछली पालन से उन्हें न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि यह मछुआरा समितियों के लिए गर्व का विषय भी है। 

सरकार की योजनाओं से प्रोत्साहन

मछुआरों ने राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का आभार व्यक्त किया, जो उन्हें मछली पालन के क्षेत्र में प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। नेताजी मछुआरा समिति के सदस्य दीना मल्लाह ने कहा कि इन योजनाओं ने उनकी मेहनत को नई दिशा दी है।

इस घटना के बाद सरोदा जलाशय एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग और मछुआरे इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। मछुआरों की मेहनत और उनकी सफलताओं ने इस क्षेत्र को एक नई पहचान दी है। 

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