भाजपा की नई चुनावी रणनीति: 50% आरक्षण नियम के तहत सामान्य सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों को प्राथमिकता, फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर सख्ती....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के आरक्षण का कार्य शनिवार को पूरा कर लिया गया। इससे पहले, भाजपा ने ओबीसी आरक्षण के लिए अपनी आंतरिक व्यवस्था लागू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य में आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता। चूंकि राज्य में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) का आरक्षण पहले से ही अधिक है, इसलिए ओबीसी के लिए अलग से आरक्षण प्रदान करना संभव नहीं है।  

दो दिन पहले भाजपा की कोर ग्रुप की बैठक हुई, जिसमें प्रभारी नितिन नबीन के समक्ष मंत्री अरुण साव ने सामान्य श्रेणी की आधी सीटों पर ओबीसी उम्मीदवार उतारने का सुझाव दिया। इस प्रस्ताव को प्रदेश अध्यक्ष किरणसिंह देव ने सर्वसम्मति से स्वीकृति दी। अब कुल 13 जिलों को अनारक्षित घोषित किया गया है, जिनमें से 7 जिलों में ओबीसी उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई जा रही है। पहले ओबीसी को 25% आरक्षण मिलता था, जिसके अनुसार 5-6 उम्मीदवार ओबीसी श्रेणी से चुने जाते थे।  

जाति प्रमाण पत्रों की गहन जांच के लिए विशेष टीम बनेगी 

हर बार आरक्षित सीटों पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले सामने आते हैं। इस बार भाजपा ने इसे रोकने के लिए कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। संगठन स्तर पर एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा, जो प्रत्येक जाति प्रमाण पत्र की बारीकी से जांच करेगी। यदि किसी कार्यकर्ता द्वारा गलत प्रमाण पत्र का उपयोग कर चुनाव में उतरने की पुष्टि होती है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है।  

महासमुंद और कवर्धा में होंगे ओबीसी उम्मीदवार

त्रिस्तरीय चुनावों के लिए भाजपा ने एक समिति का गठन किया है, जो ओबीसी बाहुल्य जिलों की पहचान कर रही है। महासमुंद और कवर्धा जैसे जिलों को चिन्हित कर लिया गया है। इसके अलावा, 5-6 अन्य जिलों की पहचान की जा रही है।  

चुनाव में उम्मीदवार चयन का फॉर्मूला तैयार

भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष और नगर निगम महापौर पदों के लिए उम्मीदवार चयन का एक विस्तृत फॉर्मूला तैयार किया है।  

1. जिला पंचायत और नगर निगम में भाजपा के जितने मंडल हैं, वे प्रत्येक तीन-तीन नामों का पैनल भेजेंगे। उदाहरण के लिए, रायपुर के 20 मंडलों से तीन-तीन नाम भेजे जाएंगे।  

2. जिला समितियां इन पैनलों से आम सहमति वाले नामों को छांटेंगी और संभावित उम्मीदवारों में से 5-6 नाम संभागीय समिति को भेजेंगी।  

3. संभागीय समिति इनमें से एक या दो नाम चयनित कर प्रदेश चुनाव समिति को भेजेगी।  

4. प्रदेश चुनाव समिति द्वारा एक नाम तय किया जाएगा, जिसकी घोषणा संभाग द्वारा की जाएगी।  

पार्षद और जनपद पंचायत के उम्मीदवार चयन के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, लेकिन इनके नामों की घोषणा जिला समितियों द्वारा संभागीय समिति की स्वीकृति के बाद की जाएगी।  

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