भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में नौकरी से बर्खास्त हुए 2,900 B.Ed सहायक शिक्षक अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। नौकरी छिनने से रोज़ी-रोटी का संकट झेल रहे इन शिक्षकों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया से दूरी बनाने का बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। सोमवार को ये शिक्षक राज्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर पहुंचे और परिवार समेत मतदान बहिष्कार की चेतावनी देते हुए अपने वोटर-ID कार्ड रद्द करने की मांग की।
नौकरी से हटाए जाने का असर और आंदोलन की शुरुआत
इन शिक्षकों को जनवरी में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद से ही उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शिक्षकों ने 14 दिसंबर को अंबिकापुर से रायपुर तक पैदल "अनुनय यात्रा" निकाली। 19 दिसंबर से रायपुर के तूता धरना स्थल में यह यात्रा धरने में बदल गई।
17 दिनों का आंदोलन: रचनात्मक और दृढ़ता का प्रदर्शन
- ब्लड डोनेशन कैंप: 22 दिसंबर को शिक्षकों ने धरना स्थल पर ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर यह संदेश दिया कि वे देश और समाज के लिए समर्पित हैं।
- सामूहिक अनशन: सेवा सुरक्षा और समायोजन की मांग को लेकर सामूहिक अनशन जारी है। तीसरे दिन 3 शिक्षिकाओं की तबीयत बिगड़ने के बावजूद आंदोलन जारी है।
- ज्ञापन और चेतावनी: निर्वाचन आयोग में ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे परिवार समेत मतदान का बहिष्कार करेंगे।
सरकारी कार्रवाई और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
मामले को लेकर सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है, जिसमें 5 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि कमेटी कब और क्या फैसला लेगी, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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