भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम बोरई से आने वाले युवा धान कलाकार चंद्रप्रकाश साहू को उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के कलाग्राम में अपनी कला प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिला है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में चंद्रप्रकाश को दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा आमंत्रित किया गया है।
प्रयागराज महाकुंभ: कला, संस्कृति और परंपरा का संगम
13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस महाकुंभ में देश-विदेश के लाखों लोग जुटेंगे। इसमें कलाग्राम विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होगा, जहां भारत के विभिन्न सांस्कृतिक केंद्रों से आए चुनिंदा कलाकार अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
धान कला: छत्तीसगढ़ की पहचान
चंद्रप्रकाश साहू अपनी धान कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने लाने का काम कर रहे हैं। उनकी कला न केवल पारंपरिक छत्तीसगढ़ी जीवनशैली को दर्शाती है, बल्कि राज्य की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करती है।
कलात्मक शिक्षा और योगदान
चंद्रप्रकाश ने खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय से लोककला में अध्ययन किया है। अपने अद्वितीय कौशल और कला के प्रति समर्पण के कारण वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। उनका कहना है, "छत्तीसगढ़ अपनी कला और संस्कृति से देश और दुनिया में एक अलग पहचान बनाता है।"
प्रदर्शन का महत्व
महाकुंभ में चंद्रप्रकाश की भागीदारी न केवल उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोककला को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी है। उनकी कला देश-विदेश से आने वाले दर्शकों के लिए छत्तीसगढ़ की लोककला और परंपरा को करीब से समझने का एक माध्यम बनेगी।
चंद्रप्रकाश साहू जैसे कलाकार न केवल अपने राज्य का गौरव बढ़ा रहे हैं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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