ब्रेकिंग NEWS : छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई: नगद लेन देन और आपत्तिजनक रिकॉर्ड मिले, गिरफ्तारी की संभावना....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर , छत्तीसगढ़ में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के घर और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। ईडी ने इस छापेमारी में नगद लेन-देन से जुड़े ठोस सबूत, आपत्तिजनक डिजिटल रिकॉर्ड और अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime - POC) के उपयोग से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं।

शराब घोटाले का मुख्य केंद्र: कवासी लखमा

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले में 2019 से 2022 के बीच कवासी लखमा का मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। ईडी का कहना है कि घोटाले से अर्जित पीओसी के जरिए कवासी लखमा को मासिक रूप से बड़ी मात्रा में नगद धनराशि मिलती थी।

ईडी की जांच में सामने आई साजिश

शराब घोटाले से संबंधित पीओसी की कुल राशि 2161 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इस घोटाले की रूपरेखा को चार मुख्य भागों में बांटा गया है:

1. भाग-ए: कमीशन

   छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (CSMCL) द्वारा डिस्टिलर्स से खरीदी गई शराब के हर 'केस' पर रिश्वत ली जाती थी।

2. भाग-बी: कच्ची शराब बिक्री

   बेहिसाब देशी शराब की अवैध बिक्री, जिसका पूरा पैसा सिंडिकेट के पास जाता था। सरकारी दुकानों से ही यह अवैध शराब बेची जाती थी।

3. भाग-सी: बाजार हिस्सेदारी

   शराब निर्माताओं को निश्चित बाजार हिस्सेदारी देने के लिए उनसे रिश्वत ली जाती थी।

4. FL-10A लाइसेंस से कमीशन

   विदेशी शराब बिक्री से भी अवैध कमाई की जाती थी।

तलाशी अभियान और जब्त संपत्ति

ईडी ने रायपुर, धमतरी और सुकमा जिलों में सात स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसमें कवासी लखमा, उनके बेटे हरीश लखमा और उनके करीबी सहयोगियों के परिसरों को खंगाला गया। तलाशी में ईडी को कई डिजिटल उपकरण, नगद लेन-देन के सबूत और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज मिले।

ईडी ने इससे पहले इस मामले में कुल 205 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, और दो पूरक अभियोजन शिकायतें विशेष न्यायालय (पीएमएलए), रायपुर में दाखिल की गई हैं।

सिंडिकेट की कार्यप्रणाली

ईडी की जांच में यह बात सामने आई कि इस घोटाले के पीछे एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अन्य लोग इस सिंडिकेट के मुख्य चेहरे थे।

- घोटाले की आय का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार के खजाने में न जाकर सीधे इस सिंडिकेट के पास पहुंचता था।

- अवैध शराब की बिक्री सरकारी ढांचे का इस्तेमाल करते हुए की जाती थी।

आगे की कार्यवाही

ईडी का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है। डिजिटल उपकरणों और जब्त दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के बाद नए खुलासे होने की संभावना है। साथ ही, इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


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