भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से दो महत्वपूर्ण राहतें प्राप्त हुई हैं। पहली यह कि बलौदाबाजार आगजनी प्रकरण में जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आ गए हैं, और दूसरी यह कि उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 21 फरवरी 2025 को इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें हाईकोर्ट में दायर याचिका को चुनौती दी गई थी। देवेंद्र यादव के वकील ने इस याचिका को निराधार बताते हुए इसे खारिज करने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए याचिका पर स्थगनादेश जारी कर दिया और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय को नोटिस जारी किया है।
विधायक के वकील विवेक तन्खा और सुमीर सोढ़ी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत याचिका को खारिज करने में त्रुटि की है, जिससे चुनाव याचिका की वैधता पर सवाल खड़ा होता है।
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र यादव ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका निर्वाचन वैध है, और जनता ने उन्हें लोकतांत्रिक रूप से चुना है। उन्होंने भरोसा जताया कि न्याय मिलेगा और सच्चाई की जीत होगी।
गौरतलब है कि 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भिलाई सीट से कांग्रेस के देवेंद्र यादव ने भाजपा प्रत्याशी प्रेम प्रकाश पाण्डेय को 1264 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस चुनाव में देवेंद्र यादव को 54,405 वोट मिले, जबकि प्रेम प्रकाश पाण्डेय को 53,141 मत प्राप्त हुए थे।
चुनाव परिणाम के बाद, प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने देवेंद्र यादव पर नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों और संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था। याचिका में तर्क दिया गया कि यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है।
चुनाव याचिका में यह उल्लेख किया गया कि चुनाव आयोग द्वारा प्रत्येक प्रत्याशी से शपथपत्र में आपराधिक रिकॉर्ड और संपत्ति संबंधी जानकारी मांगी जाती है। यदि कोई प्रत्याशी यह जानकारी छिपाता है, तो उसका निर्वाचन शून्य घोषित किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त, याचिका में यह भी दावा किया गया कि देवेंद्र यादव ने अपने नामांकन पत्र में 2018-19 की अवधि के दौरान अपनी वार्षिक आय केवल दो लाख रुपये बताई थी, जो वास्तविकता से भिन्न हो सकती है। इसमें यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए संपत्ति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाने का प्रयास किया गया।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया है। चुनाव याचिका पूरी तरह से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए याचिका पर रोक लगा दी और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय को नोटिस जारी कर दिया है।
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