महाकुंभ के 45 दिनों में 30 करोड़ की कमाई करने वाला पिंटू महर निकला अपराधी , महाकवि निराला के पौत्र अखिलेश त्रिपाठी निराला की हत्या का आरोप , वारदात में था शामिल...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : प्रयागराज: "दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूं आज जो नहीं कही"—महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की यह पंक्तियाँ उनके ही परिवार के लिए आज हकीकत बन गई हैं। हाल ही की बात जब महाकुंभ के आयोजन ने पुरे विश्व में अपनी चर्चा बटोरी थी इन्ही सभी के बीच संगम में नाव चलाने वाले नाविक परिवार ने 30 करोड़ की कमाई कर सभी को हैरत में डाल दिया था जिसका जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के बजट सत्र में नाविक पिंटू महरा का उल्लेख किया, जिसने महाकुंभ के 45 दिनों में 30 करोड़ की कमाई की, जिसके बारे में एक बेहद हैरान कर देने वाली बात सामने आई है जो यह है की वही व्यक्ति महाकवि निराला के पौत्र अखिलेश त्रिपाठी निराला की हत्या के आरोप में शामिल रहा है।

महाकवि निराला के प्रपौत्र विवेक निराला ने इस घटना पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि एक ऐसे व्यक्ति, जिसका हाथ उनके चाचा के खून से सना हो, उसे मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में सम्मानित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के इस बयान ने उनके परिवार के सात साल पुराने घाव को फिर से हरा कर दिया है।

हत्या की घटना

घटना सितंबर 2017 की है , जब पित्रपक्ष का समय था और अमावस्या का दिन था, अखिलेश त्रिपाठी निराला सब्जी खरीदने बाजार गए थे। तभी वहां अचानक बमबारी शुरू हुई, जिसमें उनकी जान चली गई। इस हमले में पिंटू महरा का नाम भी प्रमुख आरोपियों में शामिल था और मामले में गिरफ्तारियां भी हुई थीं।

विधानसभा में पिंटू महरा की प्रशंसा पर आक्रोश

विवेक निराला ने इस पर सवाल उठाया कि बिना पृष्ठभूमि जांचे और यह जाने कि उसने इतनी बड़ी कमाई किस प्रकार की, उसे उदाहरण के रूप में विधानसभा में क्यों प्रस्तुत किया गया? उन्होंने इसे बेहद शर्मनाक बताया कि जिस व्यक्ति पर हत्या और हत्या के प्रयास के कई मामले दर्ज हैं, उसे एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में दिखाया जा रहा है। यह उनके परिवार के लिए अत्यंत पीड़ादायक घटना है।

निराला परिवार की प्रतिक्रिया

विवेक ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा इस तरह के व्यक्ति की प्रशंसा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल निराला परिवार बल्कि कला और साहित्य प्रेमियों को भी गहरा धक्का लगा है। उन्होंने प्रशासन और सत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अपराधियों को इस प्रकार सफल व्यक्ति के रूप में दिखाना सही है? उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निंदा करते हुए कहा कि अपराधियों की जगह जेल में होनी चाहिए, न कि उन्हें करोड़ों कमाने का अवसर दिया जाना चाहिए।

सत्ता और अपराधियों का संबंध?

विवेक निराला ने स्पष्ट किया कि यह एक प्रशासनिक चूक हो सकती है और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री पर कोई आरोप नहीं लगाया है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्ती की बात करती है, तो फिर विधानसभा में उनके महिमामंडन का क्या औचित्य है?

हत्या का इतिहास

यह घटना 21 सितंबर 2017 की है, जब बरू हत्याकांड के गवाह गगन की हत्या के लिए आए बदमाशों ने ताबड़तोड़ बमबारी की थी। इसी हमले में अखिलेश त्रिपाठी निराला भी मारे गए थे। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पत्राचार शिक्षण संस्थान में कार्यरत थे।

निषाद और महरा परिवार की पुरानी दुश्मनी

पिंटू महरा का परिवार और बरू निषाद का परिवार कभी एक साथ नावों के ठेके, जमीन और बालू के कारोबार में साझेदार थे। लेकिन 1990 के दशक में इनके बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई, जिससे दोनों परिवारों में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। बरू निषाद बाद में माफिया पप्पू गंजिया के साथ जुड़ गया और इस दुश्मनी में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है।

मुख्यमंत्री की सफाई और विपक्ष का हमला

महाकुंभ 2025 में पिंटू महरा ने 130 नावों के जरिए अपने परिवार के साथ मिलकर 30 करोड़ की कमाई की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में यह बताने का प्रयास किया कि आम नाविक भी इतनी बड़ी कमाई कर सकता है। हालांकि, सरकार को यह जानकारी नहीं थी कि पिंटू महरा का आपराधिक इतिहास भी रहा है। इस चूक के चलते विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।

राजनीति और सत्ता की भूमिका

विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री द्वारा एक अपराधी की तारीफ किए जाने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहीं, विवेक निराला का कहना है कि उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन एक अपराधी को प्रेरणास्रोत के रूप में दिखाना अस्वीकार्य है।

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