भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक अहम फैसला लिया है जो न केवल भाषा को सरल बनाएगा, बल्कि आम लोगों के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली को समझना भी आसान करेगा। थानों में अब उर्दू और फारसी के कठिन शब्दों की जगह आसान और स्पष्ट हिंदी शब्दों का उपयोग किया जाएगा।
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस मुख्यालय ने इस बदलाव के लिए राज्य के सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के तहत 'खयानत', 'मौका मुरत्तब' जैसे 220 कठिन शब्दों को पुलिस डिक्शनरी से हटाया जाएगा और उनका हिंदी में रुपांतरण किया जाएगा।
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बात सिर्फ शब्दों की नहीं, समझ की है। पुलिस विभाग में आज भी अंग्रेजों के जमाने की भाषा चलन में है, जो न तो आम बोलचाल में उपयोग होती है और न ही आम जनता उसे समझ पाती है। थानों में 'फौती', 'इस्तगासा', 'अर्दली', 'इत्तला करना', 'कलम बंद', 'हब्श ख्वाहिश' जैसे शब्द आज भी इस्तेमाल होते हैं, जिन्हें सुनकर लोग असमंजस में पड़ जाते हैं।
अब पुलिस किसी को 'गिरफ्तार' नहीं कहेगी, बल्कि उसे 'हिरासत में लिया गया' या 'अभिरक्षा में लिया गया' बताया जाएगा। 'नकबजनी' की जगह 'सेंधमारी' या 'गृहभेदन' जैसे शब्द लिखे जाएंगे।
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75 साल बाद भी पुलिस मैन्युअल में बदलाव नहीं आया था। अपराध की जांच के तरीके भले बदले हों, लेकिन भाषा में कोई सुधार नहीं हुआ था। अब जब हिंदी शब्दावली लाई जा रही है, तो यह मातृभाषा के सम्मान की दिशा में भी एक कदम है।



