छत्तीसगढ़ को हर्बल हब बनाने की ऐतिहासिक शुरुआत, पाटन में देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक यूनिट का लोकार्पण..

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ की धरती पर हर्बल क्रांति की नई इबारत लिखी गई है। दुर्ग जिले के पाटन विधानसभा के ग्राम जामगांव (एम) में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हर्बल उद्योग को नई ऊंचाई देने वाली ऐतिहासिक परियोजना का लोकार्पण किया।
CM विष्णु देव साय द्वारा पाटन में हर्बल औषधि प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन – Forest to Pharmacy Model

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा निर्मित आधुनिक आयुर्वेदिक औषधि प्रसंस्करण इकाई, केंद्रीय भंडार गृह परिसर और स्प्रेयर बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की हर्बल एक्सट्रेक्शन यूनिट का उद्घाटन किया।

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इस मौके पर सीएम साय ने भावुक शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी को हमारी सरकार जमीनी हकीकत बना रही है। बीते डेढ़ वर्षों में हमारी सरकार जनता से किए गए वचनों को प्राथमिकता से पूरा कर रही है।

🌿 रोजगार की बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीन नई हर्बल इकाइयों से दो हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। प्रदेश का 44% हिस्सा वन से आच्छादित है, जिसका लाभ अब सीधे आदिवासी परिवारों को मिलेगा। स्थानीय जंगलों से कच्ची सामग्री एकत्र कर इन्हीं संयंत्रों में औषधियों का निर्माण होगा।

मुख्यमंत्री ने इसे मध्य भारत की सबसे बड़ी हर्बल इकाई बताया और कहा कि इससे प्रदेश की आयुर्वेदिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी।

🌱 तेंदूपत्ता संग्राहकों को राहत
सरकार ने तेंदूपत्ता की दर 4,500 से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति बोरा कर दी है, जिससे 13 लाख संग्राहक परिवार लाभान्वित होंगे। साथ ही बंद की गई ‘चरण पादुका योजना’ को पुनः शुरू किया गया, जिसके तहत पांच महिलाओं को चरण पादुका भेंट की गईं।

📢 ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का आह्वान
मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए, इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही भावनात्मक जुड़ाव भी बना रहेगा।

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वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 67 प्रकार की वनोपज का संग्रहण होता है, जिससे लाखों वनवासियों को लाभ मिलेगा। महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशनंद गिरी महाराज ने भी आयुर्वेद की महत्ता पर जोर देते हुए परियोजना की सराहना की।

🌿 प्राकृतिक संसाधनों से फार्मेसी तक
‘फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल’ को मूर्त रूप देने वाली यह इकाई 36.47 करोड़ रुपये की लागत से 27.87 एकड़ भूमि में बनी है। यहां महुआ, साल बीज, कालमेघ, गिलोय, अश्वगंधा जैसी औषधियों का वैज्ञानिक रूप से प्रसंस्करण किया जाएगा।

इकाई से सालाना 50 करोड़ रुपए मूल्य के उत्पाद तैयार होंगे। इससे महिलाओं को स्वरोजगार और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे।
20,000 मीट्रिक टन संग्रहण क्षमता वाला वेयरहाउस भी इस इकाई में तैयार किया गया है, जिससे वनोपजों का दीर्घकालीन संरक्षण संभव होगा।

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम बढ़भुम की हितग्राही शकुंतला कुरैटी को अपने हाथों से चरण पादुका पहनाई, जिसे देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। अन्य अतिथियों ने भी हितग्राहियों को चरण पादुका पहनाकर सम्मान दिया।

इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, राज्य वनोपज संघ के अधिकारीगण सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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